सिल्वर मार्केट में हलचल, 10% गिरते ही रोकनी पड़ी ट्रेडिंग, थाईलैंड से लेकर भारत तक कीमतों में भारी गिरावट

Edited By Updated: 15 May, 2026 02:27 PM

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ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में 15 मई 2026 को चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में हलचल मच गई। अचानक आई तेज गिरावट और बढ़ी हुई वोलैटिलिटी के चलते थाईलैंड के डेरिवेटिव एक्सचेंज Thailand Futures...

बिजनेस डेस्कः ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में 15 मई 2026 को चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में हलचल मच गई। अचानक आई तेज गिरावट और बढ़ी हुई वोलैटिलिटी के चलते थाईलैंड के डेरिवेटिव एक्सचेंज Thailand Futures Exchange (TFEX) को सिल्वर फ्यूचर्स ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी।

TFEX के मुताबिक, सिल्वर फ्यूचर्स का प्राइस लेटेस्ट सेटलमेंट से 10% नीचे चला गया था, जिसके बाद जोखिम नियंत्रण के तहत ट्रेडिंग रोक दी गई और बाद में प्री-ओपन सेशन के बाद बाजार दोबारा शुरू किया गया। एक्सचेंज ने डेली प्राइस लिमिट को भी ±20% तक बढ़ा दिया ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके।

भारतीय बाजार पर भी दिखा असर

इस ग्लोबल दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखा, जहां MCX पर चांदी की कीमतों में लगभग ₹9,000 से ₹10,000 प्रति किलो तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। कुछ इंट्राडे ट्रेडिंग में कीमतें ₹2,81,000 प्रति किलो के आसपास तक फिसल गईं, जिससे निवेशकों में घबराहट देखी गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी पर दबाव के पीछे कई कारण हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स में तेजी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है। ऊंची बॉन्ड यील्ड्स के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे गोल्ड और सिल्वर जैसी धातुओं की मांग प्रभावित हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोने में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। हालांकि चांदी में गिरावट ज्यादा तेज रही क्योंकि यह न सिर्फ निवेश बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड पर भी निर्भर करती है।

चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है, ऐसे में आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ने पर इसकी मांग दोहरी मार झेलती है। इसके अलावा फ्यूचर्स मार्केट में स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग की वजह से भी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना वैश्विक कमोडिटी बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत है, जिसका असर आगे चलकर ज्वेलरी सेक्टर, सिल्वर ईटीएफ और अन्य निवेश उत्पादों पर भी देखने को मिल सकता है।
 

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