RBI गवर्नर ने प्रमुख आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष में संशोधन का स्वागत किया

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 01:12 PM

rbi governor welcomes revision of base year for key economic indicators

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार वर्ष में किया गया संशोधन बदलते उपभोग रुझानों एवं आर्थिक संरचना को बेहतर ढंग से...

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार वर्ष में किया गया संशोधन बदलते उपभोग रुझानों एवं आर्थिक संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाएगा और अधिक सटीक मौद्रिक नीति एवं आर्थिक वृद्धि को समर्थन देगा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सीपीआई, जीडीपी और आईआईपी के लिए आधार वर्ष में संशोधन की घोषणा की है। इस फैसले का स्वागत करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि सीपीआई, जीडीपी और आईआईपी जैसे व्यापक आर्थिक संकेतक आरबीआई की नीति-निर्माण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि यह प्रक्रिया केवल आधार वर्ष बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पद्धतियों, भार, वस्तु टोकरी, आंकड़ा स्रोतों और गणना तकनीकों में भी संशोधन शामिल हैं। 

मल्होत्रा ने कहा कि सीपीआई आरबीआई की लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण प्रणाली का आधार है और इसके आधार वर्ष को अद्यतन करने से घरेलू उपभोग और खर्च के मौजूदा रुझानों को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित किया जा सकेगा। जीडीपी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना, खासकर सेवाओं, डिजिटल गतिविधियों और नए कारोबारी मॉडलों को बेहतर तरीके से दर्शाएगा। उन्होंने कहा कि आईआईपी की गणना में संशोधन वास्तविक अर्थव्यवस्था की गति का आकलन मजबूत करेगा। आरबीआई गवर्नर ने इसे समय के अनुरूप और स्वागत-योग्य कदम बताते हुए कहा कि इससे मूल्य स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। 

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