Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Mar, 2026 12:12 PM

घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के बीच बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने सबसे निचले स्तर से उबर गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे की बढ़त के साथ 91.57 पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,...
बिजनेस डेस्कः घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख के बीच बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने सबसे निचले स्तर से उबर गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे की बढ़त के साथ 91.57 पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी मुद्रा की मजबूती और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है। इसके चलते रुपए पर दबाव बना हुआ है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.16 पर खुला और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.30 के उच्च स्तर को छूने के बाद 91.57 पर कारोबार कर रहा था। इस तरह रुपया पिछले बंद भाव से 48 पैसे मजबूत था।
रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 56 पैसे टूटकर 92.05 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.20 प्रतिशत बढ़कर 98.93 पर था। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को शुद्ध रूप से 8,752.65 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
शॉर्ट-टर्म आउटलुक
एनालिस्ट ने कहा कि यह सुधार नाजुक हो सकता है, क्योंकि क्रूड की कीमतों में कोई भी नई तेज़ी बढ़त को कम कर सकती है और करेंसी पर नया दबाव डाल सकती है।
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा, “हालांकि रिस्क सेंटिमेंट में सुधार हो रहा है और डॉलर में गिरावट आई है, लेकिन रुपया तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल हेडलाइंस पर तेज़ी से रिएक्ट करता रहेगा। ट्रेडर्स को जल्द ही ज़्यादा उतार-चढ़ाव की उम्मीद करनी चाहिए।”