सेवा क्षेत्र की वृद्धि जुलाई में साढ़े चार साल के निचले स्तर पर, नए ऑर्डर की रफ्तार सुस्त: पीएमआई

Edited By Updated: 05 Aug, 2026 03:05 PM

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देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि जुलाई में घटकर करीब साढ़े चार साल के निचले स्तर पर आ गई। घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों में नए कारोबार के ऑर्डर धीमे पड़ने, कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग कमजोर होने के कारण कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रही। एक

नई दिल्लीः देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि जुलाई में घटकर करीब साढ़े चार साल के निचले स्तर पर आ गई। घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों में नए कारोबार के ऑर्डर धीमे पड़ने, कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग कमजोर होने के कारण कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रही। एक मासिक सर्वेक्षण में बुधवार को यह जानकारी दी गई। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) के अनुसार, कारोबारी गतिविधियां पिछले 53 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ीं। 

मांग कमजोर रहने और प्रतिस्पर्धी दबाव के बीच नए कारोबार में केवल मध्यम वृद्धि दर्ज की गई। मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव के आधार पर समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक जून के 57.4 से घटकर जुलाई में 53.3 पर आ गया। यह करीब साढ़े चार साल में वृद्धि की सबसे धीमी दर है। हालांकि, सूचकांक 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर बना रहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि सेवा क्षेत्र में उत्पादन का विस्तार लगातार जारी है।

एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "भारत का सेवा क्षेत्र जुलाई में भी बढ़ा, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ धीमी रही। कई महीनों के मजबूत प्रदर्शन के बाद घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों में नए कारोबार की वृद्धि कमजोर पड़ी।" सर्वेक्षण के अनुसार, नए कारोबार में वृद्धि फरवरी, 2022 के बाद सबसे धीमी रही। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि कड़ी प्रतिस्पर्धा, मांग में कमी, बाजार की कमजोर परिस्थितियों और ऑर्डर टाले जाने से वृद्धि प्रभावित हुई।

रोजगार के मोर्चे पर जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद जुलाई में नियुक्तियों की रफ्तार में कुछ सुधार हुआ। हालांकि, यह सुधार सीमित रहा। केवल छह प्रतिशत कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जानकारी दी, जबकि 92 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनके कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ। भंडारी ने कहा कि नियुक्तियों में मध्यम सुधार हुआ, जबकि लागत दबाव कम होने और कंपनियों द्वारा बिक्री मूल्य बढ़ाने से लाभ मार्जिन में भी सुधार आया। सर्वेक्षण के अनुसार, जुलाई में ईंधन, श्रम, कच्चे माल, प्रौद्योगिकी और परिवहन लागत बढ़ने से सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव बना रहा। 

हालांकि, निर्यात से मिलने वाले नए कारोबार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका से कारोबार बढ़ने की जानकारी दी। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में भी वृद्धि जारी रखी। सर्वेक्षण के अनुसार, बेहतर मांग और बाजार परिस्थितियों की उम्मीद, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण की रणनीति तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना से कंपनियों का कारोबारी भरोसा बना रहा। हालांकि, समग्र कारोबारी विश्वास जुलाई में घटकर सात महीने के निचले स्तर पर आ गया। इस बीच, एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई उत्पादन सूचकांक जून के 57.1 से घटकर जुलाई में 54.3 पर आ गया। यह मार्च, 2022 के बाद विस्तार की सबसे धीमी रफ्तार को दर्शाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में उल्लेखनीय सुस्ती रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन की वृद्धि में मामूली तेजी आई। 

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