Gold-Silver Drop: ऑलटाइम हाई से 154396 रुपए सस्ती हुई चांदी, जानें 10g गोल्ड का रेट, जानें गिरावट के कारण?

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 01:44 PM

silver is now 154396 rupees cheaper than its all time high know the price of 10

बजट वाले दिन जहां देश की निगाहें संसद में वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी थीं, वहीं दूसरी ओर कमोडिटी बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली। लगातार दूसरे सत्र सोने-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों को भी चौंका दिया।...

बिजनेस डेस्कः बजट वाले दिन जहां देश की निगाहें संसद में वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी थीं, वहीं दूसरी ओर कमोडिटी बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली। लगातार दूसरे सत्र सोने-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों को भी चौंका दिया। हाल तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे कीमती धातुओं के भाव 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद तेजी से फिसल गए।

सोने-चांदी में गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी को चांदी जहां 420048 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई थी, वहीं अब यह गिरकर करीब 265652 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है यानी चांदी के भाव अपने ऑलटाइम हाई से करीब 154,396 रुपए प्रति किलो तक गिर गए हैं।

सोने के हालत भी कुछ ऐसे ही हैं। कुछ दिन पहले जहां गोल्ड ने 193096 रुपए प्रति 10 ग्राम का हाई लेवल टच किया था। आज (1 फरवरी) 10 ग्राम सोना 45,506 रुपए गिरकर 147590 पर आ गया। अगर इसके हाई लेवल की बात करें तो इसमें 54,462 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है।

गिरावट के पीछे क्या हैं वजहें

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेज गिरावट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, जोरदार मुनाफावसूली। हाल के दिनों में सोना और चांदी ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए थे, ऐसे में निचले स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। दूसरा, ऊंची कीमतों के चलते फिजिकल डिमांड में आई कमी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।

मार्जिन बढ़ोतरी ने बढ़ाई बिकवाली

इस गिरावट की एक अहम तकनीकी वजह मार्जिन मनी में बढ़ोतरी भी मानी जा रही है। सेबी-पंजीकृत कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) ने कॉपर के बाद सोने और चांदी पर भी मार्जिन बढ़ा दिया है। सोने पर मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है।

मार्जिन बढ़ने से ट्रेडर्स को अपनी मौजूदा पोजीशन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी लगानी पड़ती है। जिनके पास तुरंत अतिरिक्त कैश उपलब्ध नहीं होता, उन्हें मजबूरन बिकवाली करनी पड़ती है। एक साथ बढ़ी इस बिकवाली ने बाजार में दबाव और बढ़ा दिया, जिससे कीमतें तेजी से नीचे आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मार्जिन का दबाव बना रहेगा, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

 

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