Edited By jyoti choudhary,Updated: 31 Jan, 2026 11:23 AM

केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार में ट्रेडिंग की तैयारी कर रहे निवेशकों के लिए एक अहम अलर्ट है। बजट वाले दिन भले ही बाजार खुले रहेंगे लेकिन सेटलमेंट से जुड़ा एक तकनीकी नियम आपकी शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी पर असर डाल सकता है। अगर इसे नजरअंदाज किया...
बिजनेस डेस्कः केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार में ट्रेडिंग की तैयारी कर रहे निवेशकों के लिए एक अहम अलर्ट है। बजट वाले दिन भले ही बाजार खुले रहेंगे लेकिन सेटलमेंट से जुड़ा एक तकनीकी नियम आपकी शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी पर असर डाल सकता है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया, तो खरीदे गए शेयर तय समय पर बेचने के बाद भी पैसे मिलने में देरी हो सकती है।
30 जनवरी को खरीदे गए शेयर 1 फरवरी को बेचने के लिए उपलब्ध तो होंगे लेकिन उस दिन सेटलमेंट नहीं होने की वजह से रकम उसी दिन खाते में नहीं आएगी, भले ही बजट पेश किए जाने के लिए बाजार में स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा गया हो। इसी तरह, 1 फरवरी को खरीदे गए शेयर 2 फरवरी को बेचे तो जा सकेंगे लेकिन उसका सेटलमेंट अगले कारोबारी दिन होगा, क्योंकि उस दिन भी सेटलमेंट प्रोसेस नहीं होगी।
सेटलमेंट हॉलिडे क्या होता है?
सेटलमेंट हॉलिडे वह दिन होता है जब शेयर बाजार में ट्रेडिंग सामान्य रूप से होती है लेकिन शेयरों और पैसों का वास्तविक लेनदेन पूरा नहीं हो पाता। इसकी वजह यह होती है कि उस दिन क्लियरिंग कॉरपोरेशन, बैंक और डिपॉजिटरी संस्थान—जैसे NSDL और CDSL—बंद रहते हैं। ऐसे दिन निवेशक NSE और BSE पर खरीद-फरोख्त तो कर सकते हैं लेकिन इन सौदों का सेटलमेंट अगले कार्यदिवस पर होता है यानी शेयर और पैसा तुरंत अकाउंट में क्रेडिट या डेबिट नहीं होते।
1 फरवरी क्यों है खास?
NSE ने पहले ही एक सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट के दिन शेयर बाजार खुले रहेंगे। उस दिन ट्रेडिंग सत्र सामान्य समय के अनुसार सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक चलेगा। हालांकि, सेटलमेंट हॉलिडे होने की वजह से उस दिन हुए सौदों का निपटान बाद में किया जाएगा।
बजट से बाजार को क्या उम्मीद?
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन के रास्ते पर बनी रह सकती हैं। इसके साथ ही डिफेंस सेक्टर में पूंजीगत खर्च और चुनिंदा कंजम्प्शन सपोर्ट उपायों पर जोर दिए जाने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज Jefferies के मुताबिक, सरकार FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के करीब 4.2% पर तय कर सकती है। इससे FY27 से FY31 के बीच हर साल 15–20 बेसिस पॉइंट की क्रमिक कटौती का संकेत मिलता है।
Jefferies का यह भी मानना है कि सरकार चाहें तो फिस्कल डेफिसिट को लगभग 4.4% पर बनाए रख सकती है। इससे अल्पकाल में आर्थिक ग्रोथ को सहारा मिल सकता है और शेयर बाजार के लिए यह सकारात्मक रहेगा, हालांकि बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
ब्रोकरेज के अनुमान के अनुसार, भारत का डेट-टू-जीडीपी अनुपात FY31 तक करीब 5 प्रतिशत अंक घट सकता है, हालांकि यह महामारी से पहले के स्तर से अभी भी ऊंचा रहेगा। वहीं FY27 में टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ करीब 8% रहने की संभावना है, जो लगातार तीसरा साल होगा जब टैक्स ग्रोथ 10% से नीचे रहेगी।