स्टेंट का खर्च नहीं हो रहा कम, मरीजों के साथ हो रहा धोखा

Edited By Updated: 28 Sep, 2017 05:23 PM

stent is not being spent  cheating with patients

दिल्ली के एक बड़े हार्ट सेंटर में एक मरीज को स्टेंट लगवाने में कुल 2 लाख 92 हजार 10 रुपए खर्च करने पड़े।

नई दिल्लीः स्टेंट के प्रोसीजर के नाम पर अस्पताल मरीजों से ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं और उनकी कमाई जारी है। केंद्र सरकार ने स्टेंट की कीमत पर कैपिंग (रेट फिक्स) का फैसला इसलिए लिया था ताकि मरीजों पर इसके खर्च का बोझ कम हो सके लेकिन हुआ उलट। 

मरीजों को नहीं हो रहा कोई फायदा 
दिल्ली के एक बड़े हार्ट सेंटर में एक मरीज को स्टेंट लगवाने में कुल 2 लाख 92 हजार 10 रुपए खर्च करने पड़े। इसमें स्टेंट की कीमत सिर्फ 62 हजार 160 रुपए थी। बाकी 2 लाख 29 हजार 850 रुपए अन्य मदों में खर्च हुए। बिल देखने से पता चला कि मरीज को कोई फायदा नहीं हुआ है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो कैपिंग के बाद कंस्लटेंसी फीस बढ़ गई है। एंजियोप्लास्टी और बैलून पर पहले कोई शुल्क नहीं लगता था, अब इसे भी बिल में शामिल कर दिया गया है। प्रोसीजर रेट बढ़ाए गए हैं। इस तरह से पहले और आज के बिल में कोई फर्क नहीं आया है। 

एेसे धोखा खा रहे है मरीज
साल 2016 में एक मरीज को हार्ट अटैक आया। उन्हें स्टेंट लगाया गया। इलाज पर 2 लाख 36 हजार रुपए खर्च हुए। इसमें स्टेंट की कीमत एक लाख 10 हजार रुपए थी। इलाज के प्रोसीजर का खर्च एक लाख 26 हजार रुपए रहा। इसी मरीज को दोबारा अटैक आया। अब स्टेंट के रेट फिक्स हो चुके थे। मरीज उसी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। उसे लगा कि इस बार खर्च कम आएगा, क्योंकि कैपिंग के बाद स्टेंट लगवाना सस्ता हो गया है। हुआ भी ऐसा ही। मरीज को दो स्टेंट लगे।

खर्च आया 2 लाख 24 हजार रुपये। मरीज खुश था। लेकिन वह समझ नहीं पाया कि नुकसान कहां हुआ। दरअसल, मरीज को स्टेंट पर 55 हजार रुपये खर्च करने पड़े लेकिन अस्पताल ने प्रोसीजर और अन्य खर्च के नाम पर उनसे एक लाख 69 हजार रुपये वसूल लिए। मरीज को पहली बार प्रोसीजर और अन्य खर्च के नाम पर एक लाख 26 हजार रुपये देने पड़े थे। यानी अस्पताल ने एक साल के अंतराल में ही प्रोसीजर के खर्च पर 43 हजार रुपये ज्यादा वसूले। यह है स्टेंट पर लगी कैपिंग की हकीकत।
कैपिंग के बाद एक अस्पताल में इलाज का खर्च
 

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