Edited By Sahil Kumar,Updated: 22 Mar, 2026 08:45 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रही है। मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने सोने पर दबाव बनाया है। निवेशकों की...
नेशनल डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में इस बार उल्टा रुख देखने को मिल रहा है। कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और यह 1983 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह स्थिति निवेशकों के लिए हैरान करने वाली है, क्योंकि आम तौर पर ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सोना मजबूत होता है, लेकिन इस बार बाजार के संकेत कुछ अलग ही कहानी बता रहे हैं।
दरअसल, ऊर्जा कीमतों में तेजी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने सोने पर दबाव बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। खबरों के अनुसार, अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक भेजने की तैयारी कर सकता है, वहीं पेंटागन द्वारा अतिरिक्त सैन्य तैनाती और युद्धपोतों की मौजूदगी ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
इस माहौल में बाजार को आशंका है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं या फिर और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर तक दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक आंकी जा रही है। सोने की कमजोरी का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती भी है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की आकर्षण क्षमता कम हो जाती है। यही वजह है कि निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले महीने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से सोने में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है।
तकनीकी कारणों ने भी गिरावट को तेज किया है। विश्लेषकों का मानना है कि 5200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचने के बाद सोना पहले से ही ओवरबॉट स्थिति में था। जैसे ही कीमतें नीचे आईं, स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने लगे और बिकवाली बढ़ गई। मूविंग एवरेज जैसे संकेतकों ने भी गिरावट को और गति दी। वहीं शेयर बाजार में कमजोरी के चलते जबरन बिकवाली का असर भी सोने पर पड़ा। गोल्ड ईटीएफ से लगातार तीसरे सप्ताह निकासी दर्ज की गई है और कुल होल्डिंग्स में 60 टन से अधिक की कमी आई है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में भी सुस्ती देखी जा रही है, जिससे बाजार का भरोसा कमजोर हुआ है।
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद इस साल की शुरुआत से अब तक सोना करीब 4 प्रतिशत की बढ़त बनाए हुए है। जनवरी के अंत में इसकी कीमत लगभग 5600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। फिलहाल न्यूयॉर्क बाजार में सोना करीब 4508.96 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है और लगातार आठ दिनों की गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे लंबा गिरावट का सिलसिला है। सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेज गिरावट देखी जा रही है। इस सप्ताह चांदी की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि पैलेडियम और प्लेटिनम भी नुकसान में बने हुए हैं।