Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Mar, 2026 11:13 AM

पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी देशों से होने वाली कच्चे तेल और गैस की...
LPG Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी देशों से होने वाली कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब देश में ऊर्जा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के दायरे में शामिल कर लिया गया है।
सरकार ने 'पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026' लागू किया है, जिसके तहत अब सभी सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियों, एलएनजी आयातकों और पाइपलाइन संचालकों के लिए अपने डेटा को सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की 18 मार्च की अधिसूचना के अनुसार, कंपनियों को अब उत्पादन, स्टॉक, आयात और खपत की पल-पल की जानकारी 'पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ' (PPAC) को देनी होगी। खास बात यह है कि इस नए नियम ने पुराने सभी गोपनीयता कानूनों को खत्म कर दिया है, ताकि सरकार के पास ऊर्जा से जुड़ी जानकारियों का एक पारदर्शी और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम हो।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, जिसमें 88% कच्चा तेल और लगभग 60% LPG शामिल है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों से आने वाले रास्ते बंद होने से देश में एलपीजी और औद्योगिक गैस की किल्लत महसूस की जा रही है। हालांकि सरकार रूस और अमेरिका जैसे देशों से तेल मंगवाकर इसकी भरपाई करने की कोशिश कर रही है, लेकिन घरेलू स्तर पर सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए अब डेटा की निगरानी सख्त कर दी गई है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का उपयोग करते हुए सरकार ने यह साफ कर दिया है कि जनहित में ऊर्जा आपूर्ति की निगरानी करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य बिजली, खाद कारखानों और घरेलू रसोई गैस जैसे जरूरी क्षेत्रों को बिना किसी रुकावट के फ्यूल पहुंचाना है। अधिकारियों का मानना है कि रीयल-टाइम डेटा मिलने से सरकार वैश्विक झटकों के खिलाफ बेहतर रणनीति बना पाएगी और स्टॉक का प्रबंधन मजबूती से कर सकेगी। अब कंपनियों को भी अपनी रिपोर्टिंग प्रणाली को आधुनिक बनाना होगा ताकि वे सरकार के सुरक्षा मानकों पर खरी उतर सकें।