Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 May, 2026 10:36 AM

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 1,000 अंक से अधिक टूट गया, जबकि Nifty 50 में 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 1,000 अंक से अधिक टूट गया, जबकि Nifty 50 में 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
सुबह करीब 9:50 बजे सेंसेक्स 1,010.64 अंक यानी 1.34% गिरकर 74,227.35 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 303.25 अंक यानी 1.28% टूटकर 23,340.25 पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 7 लाख करोड़ रुपए घटकर 454 लाख करोड़ रुपए रह गया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा गिरावट Power Grid Corporation of India में लगभग 3.8% की रही। इसके अलावा:
- Tata Steel
- Maruti Suzuki India
- Titan Company
- Bajaj Finance
- HDFC Bank
- Bajaj Finserv
- Mahindra & Mahindra
में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि आईटी सेक्टर ने कुछ मजबूती दिखाई। Infosys, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services के शेयर बढ़त में रहे।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए सख्त बयान के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई।
ब्रेंट क्रूड करीब 1.84% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारतीय क्रूड बास्केट भी बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ जाती है।
रुपया ऑल-टाइम लो पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 0.2% गिरकर 96.18 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।
लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में रुपए में गिरावट दर्ज हुई है। फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद रुपए में डॉलर के मुकाबले करीब 5.5% की कमजोरी आ चुकी है।