India-EU FTA: ‘मदर ऑफ ऑल डील’ से बदलेगा बाजार का खेल, कार से लेकर शराब तक होंगे सस्ते

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 01:45 PM

the mother of all deals will change the market dynamics

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया सवेरा हुआ है। करीब 20 साल की लंबी और जटिल बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमत हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है।...

बिजनेस डेस्कः भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया सवेरा हुआ है। करीब 20 साल की लंबी और जटिल बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमत हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है। यह डील इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि यह वैश्विक GDP के करीब 25 फीसदी और दुनिया के एक-तिहाई व्यापार का प्रतिनिधित्व करती है।

इस मेगा डील का असर सिर्फ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी सीधा दिखेगा। सवाल यही है कि इस समझौते के बाद भारतीय बाजार में क्या-क्या सस्ता हो सकता है? आइए जानते हैं—

लग्ज़री कारों के शौकीनों के लिए जैकपॉट

अगर आप मर्सिडीज, BMW, ऑडी या पोर्श जैसी यूरोपीय लग्ज़री कारों का सपना देखते हैं, तो यह डील आपके लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब तक इन कारों पर 100 फीसदी से ज्यादा आयात शुल्क लगता था, जिससे कीमतें दोगुनी हो जाती थीं। FTA के तहत 15,000 यूरो (करीब 16.3 लाख रुपए) से अधिक कीमत वाली कारों पर टैरिफ घटाकर 40 फीसदी करने का प्रस्ताव है। शुरुआती चरण में यह छूट सीमित कोटा के तहत मिलेगी लेकिन इसके बावजूद कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विदेशी शराब होगी जेब के अनुकूल

यूरोपीय वाइन और व्हिस्की भारत में हमेशा महंगी रही हैं, क्योंकि इन पर 100 से 125 फीसदी तक की भारी ड्यूटी लगती थी। अब इस समझौते के बाद, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई डील की तर्ज पर यूरोपीय शराब पर भी टैक्स में बड़ी कटौती हो सकती है। इसका मतलब है कि फ्रांस, इटली और स्पेन के प्रीमियम ब्रांड्स अब भारतीय ग्राहकों को पहले से सस्ते दामों पर मिल सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी के दाम घटेंगे

यूरोप अपनी हाई-टेक तकनीक और इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है। FTA लागू होने के बाद यूरोप से आयात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान, मेडिकल डिवाइसेज़, विमान के पुर्जे, केमिकल्स और हाई-एंड मशीनरी सस्ती होगी। मोबाइल पार्ट्स और औद्योगिक मशीनों पर ड्यूटी घटने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होगी, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। मेटल स्क्रैप के सस्ते आयात से स्टील और अन्य धातुओं की कीमतों में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।

भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा बूस्ट

यह समझौता सिर्फ आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए EU के 27 देशों के विशाल बाजार के दरवाजे खोल देगा। MK Global की रिपोर्ट के मुताबिक 2031 तक भारत-EU व्यापार 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। गारमेंट सेक्टर पर यूरोप में लगने वाली 10 फीसदी ड्यूटी शून्य हो सकती है, जिससे भारतीय कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी।

हीरा-जवाहरात, चमड़ा उत्पादों और जेनेरिक दवाओं को भी यूरोप के बाजार में आसान एंट्री मिलेगी। यूरोपीय मानकों के साथ तालमेल बैठने से दवा निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।


 

Related Story

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!