पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे से लॉजिस्टिक लागत घटकर सात प्रतिशत तक आ जाएगीः फडणवीस

Edited By Updated: 08 Sep, 2026 03:16 PM

western freight corridor will reduce logistics costs by up to 7 percent

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई रेल गलियारे से भारत की लॉजिस्टिक लागत घटकर करीब सात प्रतिशत रह जाएगी जिससे देश चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी करने

मुंबईः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई रेल गलियारे से भारत की लॉजिस्टिक लागत घटकर करीब सात प्रतिशत रह जाएगी जिससे देश चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी करने में सक्षम होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा दौरे पर पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के तीन महत्वपूर्ण खंडों का उद्घाटन किया। ये खंड नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ते हैं। इस खंड की शुरुआत के साथ ही परियोजना पूरी हो गई। 

फडणवीस ने नवी मुंबई के उरण में संवाददाताओं से कहा, ''भारत की लॉजिस्टिक लागत करीब 14 प्रतिशत थी जबकि चीन में यह सात प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 14 से घटाकर 10 प्रतिशत किया। लेकिन इस समर्पित माल ढुलाई गलियारे से हम इसे सात प्रतिशत तक ले आएंगे। हम चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने में सक्षम होंगे।'' उन्होंने कहा कि कई राज्यों से गुजरने वाला और उत्तर प्रदेश को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से जोड़ने वाला करीब 1,600 किलोमीटर लंबा यह माल ढुलाई गलियारा देश के माल ढुलाई एवं आपूर्ति क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा। फडणवीस ने कहा कि इस गलियारे में माल की ढुलाई डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन से की जाएगी, जिनमें एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखा जाता है। ऐसी एक ट्रेन 250 ट्रक के बराबर माल ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि बिजली से चलने वाली ट्रेन पेट्रोल और डीजल की बचत करने के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद करेंगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क मार्ग से माल पहुंचाने में करीब तीन दिन लगते हैं, जबकि इस माल ढुलाई गलियारे के जरिये यही दूरी करीब 12 घंटे में तय की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह गलियारा महाराष्ट्र के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि इसका अंतिम गंतव्य जेएनपीटी है। अगले दो साल में जेएनपीटी के वार्षिक 10 लाख से अधिक कंटेनर माल संभालने वाला देश का पहला बंदरगाह बनने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से उद्योग और व्यापार को लाभ होगा, निर्यात-उन्मुख एवं आयात पर निर्भर उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!