मैच्योरिटी से पहले ही लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी क्यों छोड़ रहे लोग? RBI रिपोर्ट में सामने आई बड़ी वजह

Edited By Updated: 16 Jul, 2026 06:06 PM

why are people surrendering life insurance policies before maturity

लाइफ इंश्योरेंस को वित्तीय सुरक्षा का मजबूत माध्यम माना जाता है लेकिन भारत में बड़ी संख्या में लोग अपनी पॉलिसी मैच्योरिटी से पहले ही बंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट 2026 के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-

बिजनेस डेस्कः लाइफ इंश्योरेंस को वित्तीय सुरक्षा का मजबूत माध्यम माना जाता है लेकिन भारत में बड़ी संख्या में लोग अपनी पॉलिसी मैच्योरिटी से पहले ही बंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट 2026 के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बीमा कंपनियों ने मैच्योरिटी बेनेफिट से अधिक राशि पॉलिसी सरेंडर और निकासी के रूप में चुकाई। रिपोर्ट के मुताबिक कुल भुगतान में 38.3% हिस्सा सरेंडर और निकासी का रहा, जबकि 36.9% भुगतान मैच्योरिटी बेनेफिट के रूप में किया गया।

RBI का कहना है कि लगातार ऊंची सरेंडर दर इस बात का संकेत हो सकती है कि कई ग्राहक अपनी पॉलिसी से संतुष्ट नहीं हैं या उन्हें खरीदते समय पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा, कुछ लोग बेहतर रिटर्न की उम्मीद में दूसरे निवेश विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

हर दो में से एक ग्राहक पांच साल से पहले छोड़ रहा पॉलिसी

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं। इनके अनुसार, देश में करीब आधी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां ही पांच साल तक जारी रह पाती हैं यानी हर दो में से एक पॉलिसीधारक पांच साल पूरे होने से पहले ही प्रीमियम भरना बंद कर देता है या पॉलिसी सरेंडर कर देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह पॉलिसियों की गलत बिक्री (Mis-selling) है। कई ग्राहकों को लाइफ इंश्योरेंस को सुरक्षा के बजाय निवेश उत्पाद के रूप में पेश किया जाता है। उन्हें कम समय में बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया जाता है लेकिन जब अपेक्षित लाभ नहीं मिलता तो वे पॉलिसी बंद कर देते हैं।

क्या कहती हैं बीमा कंपनियां?

हालांकि, बीमा कंपनियों का कहना है कि हर मामले में मिस-सेलिंग जिम्मेदार नहीं होती। नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव या अचानक पैसों की जरूरत जैसी परिस्थितियों में भी लोग पॉलिसी सरेंडर करने का फैसला लेते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लाइफ इंश्योरेंस खरीदने से पहले केवल रिटर्न पर ध्यान न दें। पॉलिसी का उद्देश्य, प्रीमियम अवधि, सरेंडर नियम और संभावित नुकसान को अच्छी तरह समझें। साथ ही बीमा कंपनी का पर्सिस्टेंसी रेशियो भी जरूर देखें, क्योंकि यह बताता है कि उसके कितने ग्राहक लंबे समय तक अपनी पॉलिसी जारी रखते हैं। सही जानकारी और सोच-समझकर लिया गया फैसला भविष्य में आर्थिक नुकसान से बचा सकता है।

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!