Edited By Niyati Bhandari,Updated: 11 Jun, 2026 10:31 AM

Adhikmas Amavasya Mithun Sankranti: 2026 का सबसे बड़ा धार्मिक वृत्तांत, 15 जून को अधिकमास अमावस्या और सूर्य संक्रांति का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। जानें 15 जून 2026 को बनने वाले अधिकमास अमावस्या और मिथुन संक्रांति के महासंयोग के बारे में।...
Adhikmas Amavasya Mithun Sankranti 2026: ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म के नजरिए से साल 2026 का जून महीना बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है। आने वाली 15 जून 2026 को आकाश मंडल में एक ऐसा दुर्लभ और पवित्र महासंयोग बनने जा रहा है, जो दशकों में कभी-कभी ही देखने को मिलता है। इस दिन न केवल ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या है, बल्कि इसी दिन सूर्य देव अपनी राशि बदलकर मिथुन में प्रवेश करेंगे, जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है।

बुधादित्य राजयोग से चमकेगा भाग्य
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 15 जून को जब सूर्य देव वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, तो वहां पहले से ही ग्रहों के राजकुमार बुध विराजमान होंगे। सूर्य और बुध की इस युति से 'बुधादित्य राजयोग' का निर्माण होगा। सूर्य और बुध आपस में मित्र ग्रह और अक्सर अधिकतर कुंडलियों में यह ग्रह एक-दूसरे के साथ रहते हैं या आस-पास रहते हैं। इन दोनों ग्रहों का कंबीनेशन ज्योतिष में बहुत ही शुभ माना जाने वाला बुधादित्य योग बनाता है। जब अमावस्या, पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) और सूर्य संक्रांति जैसे महत्वपूर्ण योग एक साथ मिलते हैं, तो इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मिथुन संक्रांति और अमावस्या का शुभ समय
मिथुन संक्रांति: 15 जून 2026, सोमवार।
संक्रांति क्षण: दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर।
महा पुण्य काल: दोपहर 12:59 से 03:19 बजे तक (अवधि 2 घंटे 20 मिनट)।
अमावस्या तिथि: 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए स्नान-दान और तर्पण इसी दिन करना श्रेष्ठ होगा।

इन 3 राशियों पर होगी धनवर्षा
इस महासंयोग का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या पर देखने को मिलेगा। इन तीनों राशियों के सुनहरी भविष्य का निर्माण होगा। अधूरे पड़े अथवा रुके काम शीघ्र पूरे होंगे। जॉब में प्रमोशन और कारोबार में धन लाभ होने के संकेत हैं। परिवार में सुखद और शांतिपूर्ण माहौल रहेगा। दुश्मन नुकसान पहुंचाने का कोई भी मौका हाथ से न जानें देंगे लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी।

अधिकमास अमावस्या और सूर्य संक्रांति के दुर्लभ संयोग में करें ये काम
प्रातः काल नित्यकर्म से निवृत होकर किसी ऐसे शिवालय में जाएं जहां शिव परिवार संग पीपल का पेड़ लगा हो। सर्वप्रथम गणपती का विधिवत पूजन करने के बाद पीपल के निमित तिल के तेल का दीपक जलाएं, सुगंधित धूप करें, पीपल पर हल्दी से तिलक करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, बर्फी का भोग लगाएं। इसके बाद पीपल की जड़ में जल, खंड मिश्रित कच्ची दही की लस्सी और पंचामृत चढ़ाएं। इसके बाद हल्दी से रंगे कच्चे सूत की गांठ पीपल पर लगाकर दूसरे हाथ में धान, धनिया, पान, हल्दी, सिंदूर व साबुत सुपारी लेकर 108 बार सूत लपेटते हुए पीपल की परिक्रमा करें। परिक्रमा के बाद सारी सामाग्री पीपल पर चढ़ा दें अथवा किसी धोबन को भेंट करें। इसके बाद मंदिर में गौरी-शंकर का पूजन करके अखंड सौभाग्य का वरदान मांगे।
