कितने प्रकार की होती हैं घंटियां, घर के पूजा स्थल में होता है किसका इस्तेमाल

Edited By Updated: 10 Jun, 2021 03:09 PM

benefits of ringing bell

धार्मिक शास्त्रों में ऐसी कई चीज़ों के बारे में बताया गया है, जिन्हें घर के मंदिर में रखना शुभ माना जाता है। इन्हीं में से एक है मंदिर की घंटी। आप में से लगभग लोगों ने देखा होगा कि मंदिरों

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धार्मिक शास्त्रों में ऐसी कई चीज़ों के बारे में बताया गया है, जिन्हें घर के मंदिर में रखना शुभ माना जाता है। इन्हीं में से एक है मंदिर की घंटी। आप में से लगभग लोगों ने देखा होगा कि मंदिरों आदि के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन समय से चला आ रहा है। ती वहीं घर के पूजा स्थल में भी गरुड़ घंटी को रखा जाता है। वास्तु व धर्म शास्त्र के अनुसार सृष्टि की रचना में ध्वनि का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हिंदू धर्म के सिद्धांत के अनुसार ध्वनि से प्रकाश की उत्पत्ति और बिंदु रूप प्रकाश से ध्वनि की उत्पत्ति होती है। जिस कारण घंटी रूप में ध्वनि को मंदिर या पूजा घर में रखा जाता है। तो आइए जानते हैं इसी गरुड़ घंटी से जुड़ी खास बातें, तथा इसे घर में रखने से क्या फायदे होते हैं। 

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ तब जो नाद था। असल में घंटी की ध्वनि को उसी नाद का प्रतीक माना जाता है। घंटी के रूप में सृष्टि में निरंतर विद्यमा नाद ओंकार या ॐ की तरह है जो व्यक्ति को मूल तत्व की याद दिलाता है।

धार्मिक और वास्तु के अनुसार घंटियां 4 प्रकार की होती हैं- गरूड़ घंटी, द्वार घंटी, हाथ घंटी और घंटा। जिनमें से गरूड़ घंटी छोटी-सी होती है जिसे एक हाथ से बजाया जाता है। द्वार घंटी द्वार पर लटकी होती है। जो बड़ी और छोटी दोनों ही आकार में मिलती है। 

हाथ वाली घंटी पीतल की ठोस एक गोल प्लेट की तरह होती है, जिसको लकड़ी के एक गद्दे से मारकर बजाया जाता है। इसके अलावा घंटा बहुत बड़ा होता है। यह लगभग 5 फुट लंबा और चौड़ा होता है। जिसे बजाने के बाद इसकी आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई देती है। गुरुड़ घंटी का मुख गुरुड़ के समान ही होता है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गरुड़ को श्री हरि विष्णु के वाहन और द्वारपाल माने जाते हैं। 

घंटी एक खास प्रकार का नाद माना जाता है, जिसकी ध्वनि से आसपास का वातावरण को शुद्ध होता है तथा इसे बजाने व सुनने वाले व्यक्ति का चित शुद्ध होता है।  वास्तु के अनुसार घंटी बजाने से वातावरण में एक कंपन पैदा होता है, जिससे वायुमंडल के जीवाणु, विषाणु आदि नष्ट होते हैं।

पूजा घर या मंदिर में प्रात: और संध्या को आरती के समय घंटी बजाने से मन शांत होता है तथा तनाव दूर हो जाता है। 

वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं जहां निरंतर रूप से घंटी बजाई जाती है, वहां से नकारात्मक शक्तियां व तमाम तरह के वास्तु दोष दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि बढ़ती है।   नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वारा खुलते हैं। इससे सभी तरह के वास्तुदोष भी दूर हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त स्कंद पुराण में कहा गया है कि घंटी बजाने से मानव के सौ जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
 

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