Chanakya Niti : रिश्तों में खटास का कारण पड़ोसी ? चाणक्य नीति में बताया गया सावधानी का तरीका

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 04:50 PM

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Chanakya Niti :  आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से सुखी और सफल जीवन के ऐसे सूत्र दिए हैं, जो सदियों बाद आज भी प्रासंगिक हैं। चाणक्य ने जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डाला है, चाहे वह राजनीति हो, धन हो या सामाजिक संबंध।

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Chanakya Niti :  आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से सुखी और सफल जीवन के ऐसे सूत्र दिए हैं, जो सदियों बाद आज भी प्रासंगिक हैं। चाणक्य ने जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डाला है, चाहे वह राजनीति हो, धन हो या सामाजिक संबंध। उनके अनुसार, एक व्यक्ति का घर और उसका वैवाहिक जीवन न केवल उसके अपने व्यवहार पर, बल्कि उसके आसपास के वातावरण और पड़ोसियों पर भी निर्भर करता है। चाणक्य नीति में स्पष्ट कहा गया है कि एक बुरा पड़ोसी उस अग्नि के समान है जो धीरे-धीरे आपके घर की शांति को जलाकर राख कर देती है। विशेषकर पति-पत्नी को अपने पड़ोसियों की कुछ आदतों से बहुत सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वे आदतें हँसते-खेलते संसार में दरार पैदा कर सकती हैं।

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घर की गुप्त बातों को जानने की उत्सुकता
चाणक्य के अनुसार, जो पड़ोसी आपके घर के निजी मामलों में अत्यधिक रुचि लेता है, वह खतरनाक हो सकता है। यदि कोई पड़ोसी बार-बार आपके घर के झगड़ों, आर्थिक स्थिति या पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेद कर पूछने की कोशिश करता है, तो समझ लीजिए कि वह आपके हित में नहीं है।

सतर्कता क्यों ? चाणक्य कहते हैं कि घर के रहस्य कभी भी बाहर नहीं जाने चाहिए। यदि पड़ोसी को आपकी कमजोरी पता चल गई, तो वह समय आने पर उसका उपयोग आपके विरुद्ध या आपके साथी को भड़काने के लिए कर सकता है।

 पति-पत्नी के बीच तुलना करना
कुछ पड़ोसियों की आदत होती है कि वे बातों-बातों में तुलना शुरू कर देते हैं। ऐसी तुलना पति या पत्नी के मन में हीन भावना या असंतोष पैदा करती है। चाणक्य नीति कहती है कि तुलना अक्सर ईर्ष्या की जड़ होती है। जब पड़ोसी लगातार आपके कान भरता है, तो धीरे-धीरे पति-पत्नी एक-दूसरे में कमियां निकालने लगते हैं, जो अंततः बड़े विवाद का रूप ले लेती है।

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बिना मांगे सलाह देना
चाणक्य ने चाणक्य नीति में स्पष्ट किया है कि बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो अपनी बुद्धि का प्रयोग सही समय पर करे। लेकिन कुछ पड़ोसी हर छोटी बात पर मुफ्त की सलाह देने आ जाते हैं। जब कोई बाहरी व्यक्ति आपके व्यक्तिगत निर्णयों में हस्तक्षेप करने लगता है, तो घर की स्वायत्तता खत्म हो जाती है। पति-पत्नी को चाहिए कि वे अपने आपसी मसले खुद सुलझाएं, न कि किसी 'तीसरे' की सलाह पर चलें।

दूसरों की बुराई या चुगली करने की आदत
चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति आपके सामने दूसरों की बुराई करता है, वह निश्चित रूप से दूसरों के सामने आपकी भी बुराई करेगा। यदि आपका पड़ोसी हमेशा मोहल्ले के अन्य लोगों की निंदा करता रहता है, तो वह आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। ऐसे लोग पति-पत्नी के मन में एक-दूसरे के प्रति या समाज के प्रति शंका पैदा कर देते हैं। शक वह दीमक है जो किसी भी रिश्ते को खोखला कर देता है।

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