Chanakya Niti: ‘उत्साह’ के बिना सफलता नहीं

Edited By Jyoti, Updated: 13 May, 2022 03:05 PM

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आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र सफलता से जुड़ी कई सूत्र बताए हैं जिन्हें अपनाने वाला व्यक्ति जीवन में सफलता को प्राप्त करता ही है लेकिन समाज में

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आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र सफलता से जुड़ी कई सूत्र बताए हैं जिन्हें अपनाने वाला व्यक्ति जीवन में सफलता को प्राप्त करता ही है लेकिन समाज में मान-सम्मान के साथ एक अलग रुतबा भी प्राप्त करता है। तो आइए जानते हैं एक बार फिर आचार्य चाणक्य के नीति सूत्र के कुछ श्लोक अर्थ व भावार्थ सहित जिसमें सफलता के अलावा कई अन्य पहलूओं पर दृष्टि डालने की कोशिश की गई है जो मानव जीवन से जुड़े हुए हैं।

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चाणक्य नीति श्लोक-
निरुत्साहाद्दैवं पतति।
अर्थ : उत्साहहीन व्यक्ति का भाग्य भी अंधकारमय हो जाता है।
भावार्थ : जो राजा उत्साही नहीं होता, प्रजा उसके विपरीत हो जाती है और शत्रु उस पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर डालता है।

चाणक्य नीति श्लोक-
न पापकर्मणामाक्रोशभयम्।
अर्थ : ‘पापी’ का नाश भला, पाप कर्म करने वाले को क्रोध और भय की चिंता नहीं होती।
भावार्थ : पापी व्यक्ति को किसी बात का भय नहीं होता और न ही वह किसी निंदा से डरता है। वह सारे कार्य गलत करता है। उसे किसी के क्रोध व भय की कोई चिंता नहीं रहती। ऐसे लोगों को राजा द्वारा तत्काल दबा देना चाहिए।

चाणक्य नीति श्लोक-
नास्त्यलसस्य शास्त्राधिगम:।
अर्थ : ‘ज्ञान’ आलसी को नहीं हो सकता
भावार्थ :आलसी व्यक्ति कभी ज्ञान पाने का इच्छुक नहीं होता। ऐसे व्यक्ति से उसका परिवार भी दुखी रहता है और समाज के लिए भी ऐसे व्यक्ति बोझ होते हैं।

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चाणक्य नीति श्लोक-
न स्त्रैणस्य स्वर्गाप्तिर्धर्मकृत्यं च।
अर्थ : अधर्म की राह है ‘काम वासना’
भावार्थ :स्त्री के प्रति आसक्त रहने वाले पुरुष को न स्वर्ग मिलता है, न धर्म-कर्म। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों के वशीभूत होकर काम वासना में लिप्त रहता है और सदैव स्त्री को भोग्या ही बनाए रखता है ऐसा व्यक्ति न तो स्वॢगक सुख प्राप्त करता है और न ही उसका मन धर्म-कर्म में प्रवृत्त होता है।

चाणक्य नीति श्लोक-
अविश्वस्तेषु विश्वासो न कर्तव्य:।
अर्थ : ‘अविश्वसनीय’ लोगों से बचो
भावार्थ : अविश्वसनीय लोगों पर कभी किसी भी तरह से विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी राजा को जिन लोगों पर जरा भी शंका हो, उनसे सतर्क रहना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग हमेशा धोखा ही देते हैं। उन पर विश्वास करना मूर्खता है। उनकी बार-बार परीक्षा लेते रहना चाहिए।

चाणक्य नीति श्लोक-
सत्यं स्वर्गस्य साधनम्।
अर्थ : सत्य से स्वर्ग की प्राप्ति  
भावार्थ : जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, वह वस्तुत: ईश्वर के बताए मार्ग पर चलता है। सत्यवादी व्यक्ति के स मुख स्वर्ग भी नतमस्तक हो जाता है।

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