Edited By Sarita Thapa,Updated: 16 Feb, 2026 02:34 PM

प्रेम को संसार की सबसे कोमल भावना माना जाता है, लेकिन जब यही भावना आपके स्वाभिमान और तरक्की की राह में बाधा बनने लगे, तो यह प्रेम नहीं बल्कि एक मानसिक बंधन बन जाता है।
Chankya Niti : प्रेम को संसार की सबसे कोमल भावना माना जाता है, लेकिन जब यही भावना आपके स्वाभिमान और तरक्की की राह में बाधा बनने लगे, तो यह प्रेम नहीं बल्कि एक मानसिक बंधन बन जाता है। महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य का मानना था कि जो प्रेम व्यक्ति को सशक्त बनाने के बजाय उसे दूसरों पर निर्भर और कमजोर बना दे, वह भविष्य में केवल दुख का कारण बनता है। अक्सर हम प्रेम में इतने डूब जाते हैं कि यह भूल जाते हैं कि एक स्वस्थ रिश्ते की नींव समर्पण के साथ-साथ सम्मान पर टिकी होती है। चाणक्य ने सदियों पहले ही बता दिया था कि प्रेम और मोह के बीच की महीन रेखा क्या है। तो आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के उन कड़वे मगर सत्य मंत्रों जो न केवल आपके टूटते रिश्तों में नई जान फूंक देंगे, बल्कि आपको यह भी सिखाएंगे कि प्रेम में अपनी मर्यादा और शक्ति को कैसे बनाए रखना है।
प्रेम और मोह के बीच का अंतर समझें
चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अत्यधिक मोह में अंधा हो जाता है, वह अपने विवेक और आत्म-सम्मान को खो देता है। यदि आपका प्रेम आपको अपने लक्ष्यों से भटका रहा है या आपको अपनी नजरों में गिरा रहा है, तो वह प्रेम नहीं, बल्कि एक बंधन है। एक स्वस्थ रिश्ता वह है जो आपको बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करे, न कि आपको कमजोर बनाए।
मंत्र: रिश्तों में गहराई रखें, लेकिन अपनी आत्मनिर्भरता कभी न खोएं।
सम्मान के बिना प्रेम का कोई मोल नहीं
चाणक्य नीति के अनुसार, जिस स्थान या रिश्ते में आपका Respect नहीं होता, वहां प्रेम कभी फल-फूल नहीं सकता। अक्सर लोग प्रेम में इतने डूब जाते हैं कि वे सामने वाले द्वारा किए गए अपमान को नजरअंदाज करने लगते हैं। चाणक्य चेतावनी देते हैं कि जिस रिश्ते में 'सम्मान' की कमी हो, वह लंबे समय तक नहीं टिकता और अंततः मानसिक क्लेश का कारण बनता है।

मंत्र: प्रेम मांगकर नहीं, बल्कि सम्मान अर्जित करके प्राप्त किया जाना चाहिए।
गोपनीयता और मर्यादा का पालन
चाणक्य के अनुसार, अपने प्रेम संबंधों की निजी बातों को हर किसी के साथ साझा करना आपके रिश्ते के लिए घातक हो सकता है। जो लोग अपने दांपत्य या प्रेम जीवन के राज दूसरों को बताते हैं, वे बाहर वालों को अपने जीवन में दखल देने का मौका देते हैं। इससे विश्वास कम होता है और गलतफहमियां बढ़ती हैं।
मंत्र: अपने और अपने साथी के बीच की बातों को 'पवित्र रहस्य' की तरह सुरक्षित रखें।
अति सर्वत्र वर्जयेत्
"अति" यानी किसी भी चीज की अधिकता हमेशा हानिकारक होती है। चाणक्य का मानना था कि जरूरत से ज्यादा भावुकता व्यक्ति को दूसरों के हाथों की कठपुतली बना देती है। अपने साथी पर पूरी तरह से निर्भर होना आपको मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। प्रेम में समर्पण जरूरी है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत पहचान को जीवित रखना उससे भी अधिक आवश्यक है।
मंत्र: प्रेम में डूबें, लेकिन होश न खोएं।

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