दिल्ली में निकली भगवान जगन्नाथ की 59वीं भव्य रथ यात्रा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रहे मुख्य अतिथि

Edited By Updated: 17 Jul, 2026 05:52 PM

delhi hosts historic 59th jagannath rath yatra with three traditional chariots

इस वर्ष की रथ यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही। पहली बार दिल्ली-एनसीआर में पुरी की परंपरा के अनुरूप भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग तीन रथों नंदीघोष, तलध्वज और देवदलन का उपयोग किया गया।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजधानी दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को भगवान श्री जगन्नाथ की 59वीं भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को रथ यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपरा मानवता, सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। इस अवसर पर दक्षिण दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और स्थानीय विधायक नीरज बसोया भी उपस्थित रहे और उन्होंने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

पहली बार तीन अलग-अलग रथों में निकली भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की यात्रा

इस वर्ष की रथ यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक रही। पहली बार दिल्ली-एनसीआर में पुरी की परंपरा के अनुरूप भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग तीन रथों नंदीघोष, तलध्वज और देवदलन का उपयोग किया गया। आयोजन का एक विशेष आकर्षण यह भी रहा कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता का संदेश देने के उद्देश्य से देवी सुभद्रा के देवदलन रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं ने खींचा।

पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद शुरू हुई रथ यात्रा

सुबह करीब 10:30 बजे पारंपरिक पाहंडी बीजे अनुष्ठान के तहत भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और देवी सुभद्रा को गर्भगृह से बाहर लाया गया। दोपहर 12 बजे तक तीनों विग्रहों को उनके-अपने रथों पर विराजमान किया गया। इसके बाद मंदिर के नामित गजपति एवं ऑयल इंडिया लिमिटेड के पूर्व निदेशक सुधाकर मोहापात्र ने पारंपरिक छेरा पहंरा अनुष्ठान संपन्न किया। दोपहर 3 बजे त्यागराज स्टेडियम के मुख्य द्वार से रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ।

इन मार्गों से होकर गुजरी यात्रा

रथ यात्रा त्यागराज स्टेडियम से शुरू होकर श्री जगन्नाथ मार्ग, विकास सदन चौराहा, आईएनए मार्केट सर्विस लेन, श्री अरविंदो मार्ग के समानांतर मार्ग, आईएनए मेट्रो स्टेशन (पिंक लाइन) और राज्यसभा कर्मचारी आवासीय परिसर से होते हुए श्री गुंडिचा मंदिर पहुंची। भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और देवी सुभद्रा यहां नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए किए गए व्यापक इंतजाम

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए थे। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, पेयजल, गर्मी और उमस से राहत के लिए जल छिड़काव तथा निःशुल्क अन्न प्रसाद की व्यवस्था की गई। चिकित्सा आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम के साथ चार एंबुलेंस तैनात रहीं। इसके अलावा अग्निशमन व्यवस्था और स्थायी व मोबाइल सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मार्ग पर सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

लोक संस्कृति और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह

रथ यात्रा के दौरान ओडिशा सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा प्रायोजित सांस्कृतिक दलों ने घोड़ा नाच, बाघ नाच और पाइका युद्ध नृत्य जैसी पारंपरिक लोक एवं मार्शल आर्ट प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। वहीं कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, लस्सी और अल्पाहार वितरण कर सेवा कार्य में सहयोग दिया।

समिति और स्वयंसेवकों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी

पूरे आयोजन की देखरेख मंदिर प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष डी.एन. साहू, मानद महासचिव के.डी. बिस्वाल तथा संयुक्त सचिव प्रद्युम्न पलई और यश अग्रवाल ने की। समिति के अन्य सदस्यों और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। त्यागराज नगर के स्थानीय निवासियों ने भी पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक आयोजन में भागीदारी निभाई।

17 से 27 जुलाई तक चलेगा रथ यात्रा महोत्सव

मंदिर प्रबंधन ने बताया कि मंदिर की परंपरा के अनुसार 17 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक 11 दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन शाम को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। साथ ही दानदाताओं के लिए लकी ड्रा और बच्चों के लिए नृत्य, गायन, चित्रकला सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा महोत्सव

रथ यात्रा महोत्सव के दौरान बच्चों और महिलाओं के लिए नृत्य, संगीत, चित्रकला तथा भक्ति आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। वहीं देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार प्रतिदिन शाम को ओडिसी, कथक, संबलपुरी और अन्य शास्त्रीय एवं लोक नृत्यों की प्रस्तुति देकर महोत्सव की भव्यता को और बढ़ाएंगे।

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