Diwali 2026 Laxmi Aarti : मां लक्ष्मी की आरती से घर में आएगी सुख-समृद्धि? जानें दीपावली पर पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 08 Nov, 2026 01:27 PM

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दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और उनकी विशेष कृपा पाने का पावन अवसर माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों, फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

Diwali 2026 Laxmi Aarti : दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और उनकी विशेष कृपा पाने का पावन अवसर माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों, फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान मंत्रों के जाप के साथ माता रानी की आरती करने की भी विशेष परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे  मन और पूरे विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी की आरती कब करनी चाहिए, आरती से पहले किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है और पूजा का सही क्रम क्या होना चाहिए। तो आइए जानते हैं दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा और आरती का शुभ मुहूर्त।

दिवाली 2026: लक्ष्मी पूजन एवं आरती के शुभ मुहूर्त

दीपावली के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा और आरती के समय को लेकर दो मुख्य मान्यताएं हैं। कुछ श्रद्धालु शाम को प्रदोष काल के दौरान पूजा-आरती करना शुभ मानते हैं, वहीं कई भक्त मध्यरात्रि में निशीथ काल के गुप्त मुहूर्त में मां लक्ष्मी का आह्वान करते हैं। 

प्रदोष काल (संध्याकालीन आरती): शाम 05:54 बजे से लेकर रात 07:50 बजे तक

निशीथ काल (मध्यरात्रि आरती): रात 11:39 बजे से देर रात 12:31 बजे तक (8-9 नवंबर की मध्यरात्रि)

लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

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