Edited By Niyati Bhandari,Updated: 05 Nov, 2026 08:56 AM

Sighting an owl is auspicious or inauspicious: दिवाली पर उल्लू का दिखना माना जाता है बेहद शुभ। जानिए पौराणिक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी ने उल्लू को ही क्यों चुना अपना वाहन और क्या हैं इसके धार्मिक मायने।
Diwali Lakshmi Vahana: हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक चित्रों और प्रतिमाओं में देवी लक्ष्मी को कमल के फूल पर विराजमान अथवा उल्लू के साथ दर्शाया जाता है। उल्लू को मां लक्ष्मी का आधिकारिक वाहन माना गया है। हालांकि, आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाला यह पक्षी आखिर धन की देवी की सवारी कैसे बना?

उल्लू क्रियाशील प्रवृत्ति का पक्षी है। वह अपना पेट भरने के लिए भोजन की तलाश में निरंतर कार्य करता रहता है। इस कार्य को वह पूरी लगन के साथ करता है। लक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही सीखने को मिलता है कि जो व्यक्ति दिन-रात मेहनत करता है, मां लक्ष्मी की उन पर सदैव कृपा होती है। वह हमेशा स्थायी रूप से मेहनती लोगों के घर में निवास करती हैं।
धार्मिक शास्त्रों ने लक्ष्मी के वाहन के चार भेद बताएं गए है अर्थात चतुर्भुजी लक्ष्मी जी के चार प्रकार के बताए गए हैं। पहला गरुड़-वाहिनी दूसरा गज-वाहिनी तीसरा सिंह-वाहिनी और चौथा उलूक-वाहिनी। लक्ष्मी जब गरुड़ पर सवार होती हैं, तब वो भगवान विष्णु के साथ विराजमान होती हैं। तब वह आकाश भ्रमण करती हैं तथा गरुड़ वाहिनी कहलाती हैं। लक्ष्मी जी जब श्वेत हाथी पर सवार होती है, तब वह धर्म लक्ष्मी कहती है, हाथी कर्मठ और बुद्धिमान प्राणी है। हाथी के समूह में हथनीयों को प्राथमिकता तथा सम्मान दिया जाता है। हाथी अपने परिवार के लिए कर्म करके भोजन अर्जित करता है। हाथी समूह में रहकर एकता बनाए रखता है तथा पारिवारिक धर्म का निर्वाह करता है। लक्ष्मी जी जब सिंह पर सवार होती हैं तब वह कर्म लक्ष्मी कहलाती हैं। ये लक्ष्मी का अघोर स्वरुप है जब व्यक्ति साम दाम दंड भेद और नीति से पैसे कमाता है तब सिंह पर सवार लक्ष्मी का उद्गमन होता है। चौथा जब लक्ष्मी जी घुग्घू अर्थात उल्लू की सवारी करती है।
रात्रि की देवी है तथा रात के समय उल्लू सदा क्रियाशील रहता हैं। उल्लू पेट भरने हेतु दिन के समय में अंधा बनकर अर्थात कोलुह का बैल बनकर कार्य करता है तथा संपूर्ण दिमाग के साथ रात में जागकर और आंखें खोलकर कार्य करता है। उल्लू पर सवार लक्ष्मी को उल्लूक वाहिनी कहा गया है।
तंत्र शास्त्र के अनुसार लक्ष्मी वाहन उल्लू रहस्यमयी शक्तियों का स्वामी है। प्राचीन ग्रीक में उल्लू को सौभाग्य और धन का सूचक माना जाता था। यूरोप में उल्लू को काले जादू का प्रतीक माना जाता है। भारत में उल्लूक तंत्र सर्वाधिक प्रचलित है। चीनी वास्तु शास्त्र फेंग्शुई में उल्लू को सौभाग्या, स्वा स्य्उल और सुरक्षा का भी पर्याय माना जाता है। जापानी लोग उल्लूल को कठिनाइयों से बचाव करने वाला मानते है। चूंकि उल्लू को निशाचर यानी रात प्राणी माना जाता है और यह अंधेरी रात में भी न सिर्फ देख सकता है बल्कि अपने शिकार पर दूर दृष्टि बनाए रख सकता है।

पौराणिक कथा से जानें, उल्लू कैसे बना माता लक्ष्मी का वाहन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय सभी देवी-देवता, पशु और पक्षी मां लक्ष्मी के पास पहुंचे और सभी ने उनसे खुद को वाहन के रूप में चुनने का आग्रह किया। तब मां लक्ष्मी ने कहा कि वह कार्तिक माह की अमावस्या की रात पृथ्वी पर आएंगी और उसी समय अपने वाहन का चयन करेंगी।
कार्तिक अमावस्या की रात जब देवी लक्ष्मी धरती पर पधारीं, उस समय चारों ओर घना अंधेरा छाया हुआ था। उस घोर अंधेरे में केवल उल्लू ही एक ऐसा पक्षी था जिसकी तेज और तीखी दृष्टि ने मां लक्ष्मी को देख लिया। वह तत्काल माता के समीप पहुंचा और उनका वाहन बनने की इच्छा प्रकट की। उल्लू की इस सतर्कता और तीक्ष्ण दृष्टि से प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी ने उसे अपने वाहन के रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से उल्लू को देवी लक्ष्मी की सवारी माना जाता है।

दिवाली पर उल्लू दिखना शुभ-अशुभ
यदि दिवाली के दिन सुबह या पूजा की रात घर के आसपास उल्लू दिखाई दे जाए, तो इसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली की रात उल्लू का दर्शन होना घर से दरिद्रता व कंगाली के दूर होने का सूचक है और इससे पूरे वर्ष जातक पर लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है।
