Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Sep, 2026 04:16 PM

भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है। यह परंपरा हमारे समाज में सदियों से चली आ रही है। यही वजह है कि मेहमान के आने पर जितनी खुशी और आदर-सत्कार किया जाता है, उनकी विदाई भई उतनी ही सम्मानजक तीरके से होनी चाहिए।
Doorstep Vastu Rules : भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है। यह परंपरा हमारे समाज में सदियों से चली आ रही है। यही वजह है कि मेहमान के आने पर जितनी खुशी और आदर-सत्कार किया जाता है, उनकी विदाई भई उतनी ही सम्मानजक तीरके से होनी चाहिए। अक्सर आपने घर के बुजुर्गों को कहते हुए सुना होगा कि जब कोई मेहमान घर से विदा ले रहा हो, तो चौखट पर खड़ा होकर रोना नही चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस लोक मान्यता के पीछे धार्मिक और वास्तु कारण छिपे हैं। तो आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में-
धार्मिक मान्यता
शास्त्रों में माना गया है कि जब कोई मेहमान घर में आते हैं, तो उनके साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा देव-आशीर्वाद का प्रवेश होता है। सनातन परंपरा के अनुसार, रोना या आंसू बहाना नकारात्मक ऊर्जा और शोक का प्रतीक माना गया है। विदाई के वक्त आंसू बहाने से उस मांगलिक माहौल में विघ्न पड़ता है। ऐसी मान्यता है कि विदाई के समय रोने या क्लेश करने से घर की सुख-शांति पर असर पड़ता है और धन की देवी मां लक्ष्मी व मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं।
वास्तु शास्त्र मुख्य द्वार का महत्व
वास्तु शास्त्र में घर की चौखट को केवल लकड़ी या पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा के आदान-प्रदान का सबसे मुख्य केंद्र माना गया है। चौखट वह स्थान है जहां से घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और नकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है। विदाई के समय चौखट पर रोने या दुखी होने से वहां एक भारी और नकारात्मक ऊर्जा जम जाती है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, मुख्य द्वार पर किसी को रोते हुए देखकर घर से निकलना यात्री के लिए 'शकुन शास्त्र' के लिहाज से अच्छा नहीं माना जाता। इससे व्यक्ति के कार्य या यात्रा में मानसिक तनाव और अड़चनें आने की संभावना रहती है।
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