Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Mar, 2026 06:13 PM

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत न केवल आत्मिक शुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने का भी एक जरिया है।
Ekadashi Vrat Rules : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत न केवल आत्मिक शुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने का भी एक जरिया है। लेकिन, एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कठोर और सूक्ष्म हैं। अक्सर भक्त पूरी श्रद्धा के साथ उपवास तो रखते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी चीजों का स्पर्श या सेवन कर लेते हैं, जिससे उनका पवित्र उपवास खंडित हो जाता है। तो आइए जानते हैं की एकदाशी के दिन किन नियमों का पालन करना चाहिए।
भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन
चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन चावल में 'अशुभ तत्व' का वास होता है। व्रत न रखने वालों को भी इस दिन चावल से परहेज करना चाहिए।
अनाज और दालें: एकादशी के व्रत में गेहूं, जौ, मक्का और दालों का सेवन निषेध है। यह व्रत पूर्णतः फलाहार या निर्जला रखा जाता है।
तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसी तामसिक चीजों का स्पर्श भी मन को अशुद्ध कर सकता है। व्रत के एक दिन पहले से ही इनका त्याग कर देना चाहिए।
सफेद नमक: साधारण समुद्री नमक के बजाय केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें, वह भी यदि आप फलाहार कर रहे हैं तो।
मसाले: लाल मिर्च, हींग और राई जैसे मसालों से परहेज करें। काली मिर्च और जीरा शुद्धता के साथ उपयोग किया जा सकता है।

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क्रोध और कटु वचन: एकादशी के दिन किसी पर गुस्सा करना या अपशब्द बोलना व्रत के पुण्य को कम कर देता है। शांत रहकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें।
तुलसी के पत्ते तोड़ना: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
दिन में सोना: व्रत के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए। इस समय का उपयोग धार्मिक ग्रंथों के पाठ या कीर्तन में करना चाहिए।
बाल और नाखून काटना: एकादशी के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना अशुभ माना जाता है।
परनिंदा : दूसरों की चुगली या बुराई करने से मन की एकाग्रता भंग होती है और व्रत का आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता।

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