Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 May, 2026 04:40 PM

हिंदू धर्म में शनि जयंती का बहुत खास महत्व है। 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस साल शनि जयंती की खास बात यह है कि इस बार यह जयंती शनिवार के ही दिन पड़ रही है - एक ऐसा दुर्लभ संयोग जो आपकी सोई हुई किस्मत को जगा सकता है।
Shani Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में शनि जयंती का बहुत खास महत्व है। 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस साल शनि जयंती की खास बात यह है कि इस बार यह जयंती शनिवार के ही दिन पड़ रही है - एक ऐसा दुर्लभ संयोग जो आपकी सोई हुई किस्मत को जगा सकता है। शनिवार और शनि जयंती का यह मिलन साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कहते हैं जो भी इंसान शनिवार को शनिदेव को तेल अर्पित कर देता है उसे शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है और अगर बात हो शनि जयंती की तो ये उपाय और भी पॉवरफुल बन जाता है। लेकिन गलत तरीके से चढ़ाया गया एक लोटा तेल पुण्य की जगह भारी नुकसान भी करा सकता है। तो आइए जानते हैं शनि देव को प्रसन्न करने की वो गुप्त विधि और कुछ ऐसी गलतियां जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए।
शनिदेव को तेल चढ़ाने की सही विधि
शनि देव को तेल चढ़ाना उनके क्रोध को शांत करने का सबसे अचूक उपाय है, लेकिन ध्यान रखें, भूलकर भी तेल को शनिदेव के सिर से अर्पित न करें। हमेशा पैर के अंगूठे से शुरू करते हुए चरणों में ही तेल अर्पित करें।
तो वहीं शनि देव की आंखों में कभी भी झांककर न देखें। अपनी नज़रें हमेशा उनके चरणों की ओर रखें।
प्रतिमा के बिल्कुल सामने खड़े होने के बजाय हमेशा तिरछा खड़े होकर पूजा करें।
बता दें, शनिदेव की पूजा के दौरान सरसों का तेल या तिल का तेल ही इस्तेमाल करें। तेल चढ़ाते समय मन ही मन में 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' या 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' का जाप करते रहें।
अगर आप साढ़ेसाती से बहुत ज़्यादा परेशान हैं, तो 'छाया दान' ज़रूर करें। यानि कि सूर्यास्त के बाद शाम 8 बजे तक एक लोहे या कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखें। इसके बाद उस तेल को पात्र सहित दान कर दें। इसके साथ काले तिल, काली उड़द और काले वस्त्र का दान आपकी समस्याओं को शनि देव के चरणों में समर्पित कर देगा।
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