Garud Puran : आज ही सुधार लें ये आदतें, वरना बुद्धि और भाग्य दोनों हो जाएंगे कमजोर

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 04:27 PM

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Garud Puran :  सनातन धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष स्थान है। इसे केवल मृत्यु के बाद सुना जाने वाला ग्रंथ मानना एक बहुत बड़ी भूल है; वास्तव में यह जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला और नीति शास्त्र है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन...

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Garud Puran :  सनातन धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष स्थान है। इसे केवल मृत्यु के बाद सुना जाने वाला ग्रंथ मानना एक बहुत बड़ी भूल है; वास्तव में यह जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला और नीति शास्त्र है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ देव को विस्तार से बताया है कि मनुष्य के कौन से कर्म और आदतें उसे स्वर्ग या नर्क की ओर ले जाती हैं। भगवान विष्णु के अनुसार, कुछ ऐसी मानवीय आदतें हैं जो न केवल हमारे भाग्य को नष्ट करती हैं, बल्कि हमारी बुद्धि का भी पूरी तरह नाश कर देती हैं। जब बुद्धि नष्ट हो जाती है, तो मनुष्य स्वयं ही अपने विनाश का मार्ग चुन लेता है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण में वर्णित उन आदतों के बारे में, जिनसे हर व्यक्ति को दूर रहना चाहिए।

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 गंदे वस्त्र धारण करना
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति स्नान नहीं करता या सदैव गंदे और दुर्गंधयुक्त वस्त्र धारण करता है, उसके पास कभी लक्ष्मी नहीं टिकती। अस्वच्छता आलस्य को जन्म देती है। आलसी व्यक्ति की तर्क शक्ति और सोचने की क्षमता धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। धन की देवी लक्ष्मी को स्वच्छता प्रिय है। गंदे रहने वाले व्यक्ति का सौभाग्य रूठ जाता है और दरिद्रता उसका पीछा नहीं छोड़ती।

सूर्योदय के बाद तक सोना
शास्त्रों में 'ब्रह्म मुहूर्त' में जागने का विधान है। गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति सूर्योदय के काफी देर बाद तक सोता रहता है, वह मानसिक रूप से कमजोर होने लगता है। देर तक सोने से शरीर में तमोगुण बढ़ता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता  प्रभावित होती है। ऐसे व्यक्ति का समय प्रबंधन बिगड़ जाता है और वह सफलता के अवसरों को खो देता है।

 पराई स्त्री या पुरुष पर कुदृष्टि रखना
चरित्र की पवित्रता को गरुड़ पुराण में सबसे बड़ा धन माना गया है। जो व्यक्ति अपने जीवनसाथी को छोड़कर दूसरे के प्रति कामुक भावना रखता है, उसका पतन निश्चित है। कामवासना में अंधा व्यक्ति उचित-अनुचित का भेद भूल जाता है। उसकी एकाग्रता भंग हो जाती है और वह अनैतिक कार्यों में संलिप्त होकर अपना सामाजिक और मानसिक पतन कर लेता है।

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अहंकार और स्वयं की प्रशंसा करना
अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस व्यक्ति के भीतर 'मैं' का भाव आ जाता है, उसकी बुद्धि कुंठित हो जाती है। अहंकारी व्यक्ति दूसरों की अच्छी सलाह को भी स्वीकार नहीं करता। इतिहास गवाह है कि रावण जैसे महाविद्वान की बुद्धि का नाश भी केवल अहंकार के कारण ही हुआ था। जब अहंकार बढ़ता है, तो भाग्य का सूर्य अस्त होने लगता है।

कटु वचन बोलना और निंदा करना
दूसरों का अपमान करना या पीठ पीछे बुराई करना एक ऐसी आदत है जो व्यक्ति के संचित पुण्यों को नष्ट कर देती है। जो लोग हर समय नकारात्मक बातें करते हैं या दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, उनकी ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। इससे उनकी वाणी की शक्ति और बुद्धि की प्रखरता समाप्त हो जाती है।

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