Edited By Prachi Sharma,Updated: 21 Jan, 2026 03:50 PM

Inspirational Story : एक धनवान व्यक्ति के यहां चार बेटों की चार बहुएं आईं। वे बड़े गुस्सैल स्वभाव की थीं और प्रतिदिन आपस में लड़ती थीं। दिन-रात गृह-कलह ही मचा रहता। इससे नाराज होकर लक्ष्मी जी ने वहां से चले जाने का निश्चय किया।
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Inspirational Story : एक धनवान व्यक्ति के यहां चार बेटों की चार बहुएं आईं। वे बड़े गुस्सैल स्वभाव की थीं और प्रतिदिन आपस में लड़ती थीं। दिन-रात गृह-कलह ही मचा रहता। इससे नाराज होकर लक्ष्मी जी ने वहां से चले जाने का निश्चय किया।
रात को देवी लक्ष्मी ने उस सेठ को स्वप्न में आकर बताया कि अब मैं जा रही हूं। जहां ऐसे लड़ने झगड़ने वाले लोग रहते हैं वहां मैं नहीं रह सकती। सेठ रोने लगा और कहा मैं आपका भक्त रहा हूं। मुझे छोड़कर आप न जाएं। देवी को उस पर दया आई और कहा कलह के स्थान पर मेरा ठहर सकना तो संभव नहीं, ऐसी स्थिति में अब मैं तेरे घर तो किसी भी प्रकार न रहूंगी पर तुझे कुछ और मांगना हो तो मांग ले।
धनिक ने कहा अच्छा मां यही सही। आप वरदान दें कि मेरे घर के सब लोगों में हमेशा प्रेम और एकता बनी रहे। लक्ष्मी ने वही वरदान दे दिया और वहां से चली गईं। दूसरे दिन से ही सब लोग प्रेम पूर्वक रहने लगे और मिलजुल कर सब काम करने लगे।
एक दिन धनिक ने स्वप्न में देखा कि लक्ष्मी जी घर में फिर वापस आ गई हैं। उसने उन्हें प्राणाम किया और दोबारा पधारने के लिए धन्यवाद दिया। लक्ष्मी ने कहा इसमें धन्यवाद की कोई बात नहीं है। जहां एकता होती है और प्रेम रहता है वहां तो मैं बिना बुलाए ही पहुंच जाती हूं।