Edited By Sarita Thapa,Updated: 30 Jan, 2026 03:28 PM

समाज में अक्सर यह देखा जाता है कि जो व्यक्ति दूसरों का भला करता है, जिसका हृदय शुद्ध है और जो सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह अक्सर स्वयं को अकेला महसूस करता है।
Premanand Ji Maharaj Techening : समाज में अक्सर यह देखा जाता है कि जो व्यक्ति दूसरों का भला करता है, जिसका हृदय शुद्ध है और जो सच्चाई के मार्ग पर चलता है, वह अक्सर स्वयं को अकेला महसूस करता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अच्छाई का फल एकांत क्यों। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने इस विषय पर एक बहुत ही गहरी और आध्यात्मिक सच्चाई से पर्दा उठाया है। उनके अनुसार, अच्छे लोगों का अकेलापन कोई दंड नहीं, बल्कि ईश्वर की एक विशेष कृपा और उनके आध्यात्मिक उत्थान का एक मार्ग है। महाराज जी बताते हैं कि जब संसार किसी सच्चे व्यक्ति का साथ छोड़ देता है, तब वहां से एक ऐसी यात्रा शुरू होती है जो सीधे परमात्मा से जुड़ती है। तो आइए जानते हैं, प्रेमानंद जी महाराज के उन अनमोल विचारों को, जो अकेलेपन की इस पीड़ा को एक नई दृष्टि और शक्ति प्रदान करते हैं।
यह अकेलापन नहीं, शुद्धिकरण है
महाराज जी कहते हैं कि जब भगवान किसी पर विशेष कृपा करना चाहते हैं, तो वे उसके आसपास से उन लोगों को हटा देते हैं जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधा बन सकते हैं। यदि आपके साथ बुरा चाहने वाले या मतलबी लोग जुड़े रहेंगे, तो आप कभी भी परमात्मा की ओर नहीं बढ़ पाएंगे। इसलिए, भगवान धीरे-धीरे 'भीड़' कम कर देते हैं ताकि आप केवल उनके करीब आ सकें।
मोह का धागा तोड़ना
अकेलेपन का एक बड़ा कारण 'मोह' है। महाराज जी के अनुसार, अच्छे लोग अक्सर दूसरों से बहुत जल्दी और गहरा लगाव कर लेते हैं। संसार नश्वर है और यहां के रिश्ते स्वार्थ पर टिके हैं। जब भगवान देखते हैं कि उनका भक्त किसी गलत व्यक्ति के मोह में फंसकर अपना जीवन व्यर्थ कर रहा है, तो वे उस रिश्ते को तोड़ देते हैं। यह अलगाव हमें यह सिखाने के लिए होता है कि संसार में कोई भी 'अपना' नहीं है, केवल ईश्वर ही स्थायी साथी हैं।

'एकांत' और 'अकेलेपन' में अंतर
महाराज जी एक बहुत सुंदर बात कहते हैं- संसारी व्यक्ति अकेले होने पर 'अकेलापन' महसूस करता है, लेकिन एक साधक अकेले होने पर 'एकांत' का आनंद लेता है। अच्छे लोग जब अकेले होते हैं, तो उनके पास खुद को जानने और नाम जप करने का सबसे उत्तम समय होता है। जिसे दुनिया अकेलापन कह रही है, वह वास्तव में ईश्वर द्वारा दिया गया वह 'स्पेस' है जहां आप अपनी आत्मा से मिल सकें।
कर्मों का हिसाब
कभी-कभी पिछला प्रारब्ध भी इसकी वजह होता है। महाराज जी समझाते हैं कि अच्छे लोगों के दुख और उनका अकेलापन उनके पुराने पापों को तेजी से काट रहा होता है। भगवान उन्हें इस जन्म में संघर्ष देकर शुद्ध कर देते हैं ताकि वे अंत में सीधे उनके धाम पहुंच सकें।

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