Edited By Sarita Thapa,Updated: 26 Apr, 2026 12:18 PM

शिव जो प्रकृति की हर चीज में वास करते हैं, शायद इसीलिए तो साधारण-सी दिखने वाली चीजें भी अद्भुत और रहस्यमयी बन जाती हैं। जिला सोलन के अर्की में भोलेनाथ का प्रसिद्ध मंदिर लुटरु महादेव के नाम से जाना जाता है।
Lutru Mahadev Mandir : शिव जो प्रकृति की हर चीज में वास करते हैं, शायद इसीलिए तो साधारण-सी दिखने वाली चीजें भी अद्भुत और रहस्यमयी बन जाती हैं। जिला सोलन के अर्की में भोलेनाथ का प्रसिद्ध मंदिर लुटरु महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान भोलेनाथ सिर्फ चिलम का कश नहीं लगाते बल्कि धुएं को हवा में भी उड़ाते हैं। सुनने में भले ही अजीब लगे मगर महादेव के भक्त तो यही मानते हैं। पहाड़ियों पर प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित इस मंदिर की खासियत है कि यहां दर्शन करने के लिए आने वाले सभी भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग को सिगरेट अर्पित करते हैं। शिवलिंग पर इसे अर्पित करने के बाद उसे कोई सुलगाता नहीं है बल्कि वह खुद-ब-खुद सुलगती है। बकायदा धुआं भी निकलता है, मानो स्वयं भोले बाबा कश लगा रहे हों। हालांकि, कुछ लोग इसमें विज्ञान तलाश इसे अंधविश्वास भी करार देते हैं किंतु भोले के भक्तों के लिए तो यह शिव की महिमा है, आखिर भक्त और भगवान को विश्वास ही तो जोड़ता है।
पवित्र शिवलिंग
लुटरु महादेव मंदिर का निर्माण 1621 में करवाया गया था। कहा जाता है कि बाघल रियासत के तत्कालीन राजा को भोलेनाथ ने सपने में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया था। एक मान्यता यह भी है कि स्वयं भगवान शिव कभी इस गुफा में रहे थे। आग्नेय चट्टानों से निर्मित इस गुफा की लंबाई पूर्व से पश्चिम की तरफ लगभग 25 फुट और उत्तर से दक्षिण की ओर 42 फुट है। गुफा की ऊंचाई तल से 6 फुट से 30 फुट तक है। गुफा के अंदर भाग में प्राचीन प्राकृतिक शिव की पिंडी विद्यमान है।
मन्दिर के पुजारी की मानें तो लुटरु महादेव मंदिर बेहद पुराना है और सतयुग काल से है। उन्होंने बताया कि यह अगस्त्य मुनि की तपोस्थली है। वह यहां तपस्या किया करते थे। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी को स्थापित किया जा रहा था तो समुद्र को शांत कराने के लिए बहुत प्रयत्न किए गए। उसके बाद भोले बाबा ने यहां आकर अगस्त्य मुनि जी को दर्शन दिए और कहा कि आप समुद्र को शांत करवाएं ताकि पृथ्वी स्थापित हो सके। मन्दिर के पुजारी ने बताया कि सिगरेट चढ़ाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है।

इसलिए विशेष है मंदिर
मंदिर में स्थापित शिवलिंग भी अपने आप में बेहद अनोखा है। इस पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं, इन्हीं गड्ढों में लोग सिगरेट को फंसा देते हैं। लुटरु महादेव गुफा की छत में परतदार चट्टानों के रूप में भिन्न-भिन्न लंबाइयों के छोटे-छोटे गाय के थनों के आकार के शिवलिंग हैं। मान्यता के अनुसार इनसे कभी दूध की धारा बहती थी। शिवलिंग के ठीक ऊपर गुफा पर छोटा-सा गाय के थन के जैसा शिवलिंग है, जहां से पानी की एक-एक बूंद ठीक शिवलिंग के ऊपर गिरती रहती है।
गुफा को भगवान परशुराम की कर्मस्थली भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं की मानें तो सहस्त्रबाहु का वध करने के बाद भगवान परशुराम ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। पंजाब के चमकौर साहिब के शिव मंदिर के महात्मा शीलनाथ भी करीब 4 दशक पूर्व यहां आराधना करते थे। शिवलिंग पर जलते हुए सिगरेट के अद्भुत नजारों को देखने के बाद लोग इसे कैमरे में कैद करने से खुद को नहीं रोक पाते और ऐसा करने पर कोई पाबंदी भी नहीं है। वर्ष 1982 में केरल राज्य में जन्मे महात्मा सनमोगानन्द सरस्वती जी महाराज लुटरू महादेव मंदिर में पधारे। आज भी उनकी समाधि यहां बनी हुई है।
ऌगुफा के नीचे दूरदराज से आने वाले भक्तों के लिए धर्मशाला भी बनाई गई है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ