Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 May, 2026 02:29 PM

हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें से आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी हैं। शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी को शत्रुओं के दमन और बाधाओं के नाश के लिए जाना जाता है।
Maa Baglamukhi temples : हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें से आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी हैं। शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी को शत्रुओं के दमन और बाधाओं के नाश के लिए जाना जाता है। जानते हैं देश के मशहूर बगलामुखी मंदिरों के बारे में जहां आम आदमी से लेकर मशहूर शख्सियत तक अपनी मुरादें लेकर आते हैं।
महाभारत काल से जुड़ा नलखेड़ा मंदिर
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में स्थित नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि इसकी स्थापना स्वयं पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण के निर्देश पर की थी। लखुंदर नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में मां बगलामुखी की स्वयंभू प्रतिमा है। यहां पूजा में पीली वस्तुओं का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है।
दतिया की सत्तादात्री मां पीताम्बरा
मध्य प्रदेश के ही दतिया जिले में स्थित पीताम्बरा पीठ एक प्रमुख शक्तिपीठ है। इसे सत्ता और राजनीति की देवी के रूप में पूजा जाता है। साल 1935 में स्थापित इस पीठ की महत्ता इतनी अधिक है कि बड़े-बड़े राजनेता और मशहूर हस्तियां यहां मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं। यहां मां बगलामुखी के साथ धूमावती देवी के दर्शन भी किए जाते हैं।

हिमाचल का कांगड़ा धाम
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बगलामुखी मंदिर अपनी अलौकिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से कानूनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता पाने के लिए भक्त यहां दूर-दूर से आते हैं। यहां घी के दीए जलाकर माता की विशेष साधना की जाती है, जिससे जीवन के बड़े संकट भी टल जाते हैं।
पीले रंग का महत्व और भोग
मां बगलामुखी को पीताम्बरा भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी की गांठ और बेसन के लड्डू अर्पित करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि जयंती के दिन पीले रंग की सामग्री का दान करने से आर्थिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

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