हरियाली तीज पर हरे रंग का क्या है महत्व, जानिए

Edited By Updated: 08 Aug, 2021 03:51 PM

importance of green color on hariyali teej

सावन मास में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास मैं आने वाली अमावस्या को सामी मर्सिया के नाम से जाना जाता है तो वही सावन मास के शुक्ल

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सावन मास में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास मैं आने वाली अमावस्या को सामी मर्सिया के नाम से जाना जाता है तो वही सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। बताया जाता है कि इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है तथा हरे रंग के वस्त्र धारण करते हैं परंतु इस दिन हरे रंग का क्या महत्व है महिलाएं सोलह श्रृंगार क्यों करती है इन तमाम बातों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है तो चलिए आपको बताते हैं हरियाली तीज के दिन महिलाओं के सोलह श्रृंगार का रिवाज है तथा इस दिन हरे रंग को धारण करने का क्या महत्व होता है उर्मिला बता दे सावन मास के अलावा भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज के नाम से जाना जाता है जिस दिन महिलाओं द्वारा व्रत किया जाता है।


धार्मिक शास्त्र के अनुसार सोलह श्रृंगार अखंड सौभाग्य की निशानी है। यही कारण है कि हरियाली तीज के दौरान महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। महिलाएं यह श्रृंगार अपने पति की कुछ हार्दिक तरक्की सेहत तथा दीर्घायु के लिए करती हैं। इसके अलावा इस दिन भगवान शंकर और माता गौरी की पूजा भी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज के तीसरे दिन महिलाएं सुबह गृह कार्य और सामान से निवृत्त होकर सबसे पहले सोलह श्रृंगार करती है तथा पति की दीर्घायु के लिए पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।


यहां जानिए सोलह श्रृंगार-
मेहंदी, बिंदी, झुमके, बाजूबंद, मांग टीका, मंगल सूत्र, नथ, काजल, सिंदुर, कमरबंद, बिछिया, पायल, अंगूठी, चूड़ियां, साड़ी और गजरा। उपरोक्त में से मेहंदी, चूड़ियां, साड़ी, कमरबंद, बाजूबंद, मांग टीक, झुमके, बिंदी आदि में हरे रंग का उपयोग किया जाता है।


क्या होता है हरे रंग का महत्व-
कहा जाता है कि हरियाली तीज के दिन हरे रंग के कपड़े धारण करने से दिमाग शांत रहता है और घर में कलह क्लेश नहीं होता।

इस रंग से जीवन में उत्साह, उमंग व खुशहाल बढ़ती है।

कहा जाता है कि हरे रंग की कांच की चूड़ियां पहनने से पति की उम्र बढ़ती है।

तो वही हरा रंग स्वास्थ्यवर्धक भी माना गया है। आयुर्वेद में इसे कई रोगों के उपचार के लिए  लाभकारी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरा रंग माता पार्वती का प्रिय रंग है जिस कारण भगवान शंकर को भी बेहद पसंद है।


माना जाता है कि श्रावण मास में प्रकृति में चारों ओर केवल हरियाली छाई दिखाई देती है इसलिए भी हरियाली तीज पर खास तौर पर महिलाएं अपने श्रृंगार में हरे रंग का इस्तेमाल करती हैं।

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