Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Jan, 2026 03:50 PM

किसी गांव में एक किसान रहता था। वह रोज प्रात: काल एक झरने से पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे से बांधकर अपने कंधे पर लटका लेता था।
Inspirational Story: किसी गांव में एक किसान रहता था। वह रोज प्रात: काल एक झरने से पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे से बांधकर अपने कंधे पर लटका लेता था। उनमें से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एकदम सही था। इस वजह से रोज घर पहुंचते-पहुंचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था।
सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वह पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है। दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वह आधा पानी ही घर तक पहुंचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार जाती है। फूटा घड़ा यह सोचकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उसने किसान से कहा, ‘‘मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूं।’’
किसान बोला कि तुम किस बात पर शर्मिंदा हो। फूटा घड़ा बोला, ‘‘शायद आप नहीं जानते कि मैं एक जगह से फूटा हुआ हूं और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुंचाना चाहिए था, बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूं।’’ फूटे घड़े की बात सुनकर किसान बोला, ‘‘कोई बात नहीं, मैं चाहता हूं कि आज लौटते वक्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुंदर फूलों को देखो।’’ घड़े ने वैसा ही किया। ऐसा करने से उसकी उदासी दूर हुई।
किसान बोला, ‘‘रास्ते में जितने भी फूल थे वे बस तुम्हारी तरफ ही थे। सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था। मैं हमेशा से तुम्हारी कमी जानता था लेकिन मैंने उसे खूबी में बदल दिया। तुम्हारी तरफ वाले रास्ते पर मैंने रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे। तुम रोज थोड़ा-थोड़ा कर उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया। आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूं और अपने घर को सुंदर बना पाता हूं।”
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