Edited By Prachi Sharma,Updated: 06 Feb, 2026 04:02 PM

Inspirational Story : पंडित श्रीराम नाथ नगर के बाहर एक कुटिया में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। एक दिन जब वे विद्यार्थियों को पढ़ाने जा रहे थे, उनकी पत्नी ने उनसे पूछा- आज भोजन में क्या बनेगा? घर में एक मुट्ठी चावल ही हैं।
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Inspirational Story : पंडित श्रीराम नाथ नगर के बाहर एक कुटिया में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। एक दिन जब वे विद्यार्थियों को पढ़ाने जा रहे थे, उनकी पत्नी ने उनसे पूछा- आज भोजन में क्या बनेगा? घर में एक मुट्ठी चावल ही हैं।
पंडित जी ने पत्नी की ओर पल भर के लिए देखा और बिना कोई उत्तर दिए चले गए। भोजन के समय जब उन्होंने थाली में थोड़े से चावल और उबली हुई कुछ पत्तियां देखीं तो पत्नी से पूछा, "यह स्वादिष्ट साग किसका है ?"
पत्नी बोलीं, "मेरे पूछने पर आपकी दृष्टि इमली के वृक्ष की ओर गई थी। मैंने उसी के पत्तों का साग बनाया है।"
पंडित जी ने कहा, "इमली के पत्तों का साग इतना स्वादिष्ट होता है। तब तो हमें भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही।"
जब नगर के राजा को पंडित जी की गरीबी का पता चला तो उन्होंने पंडित जी के सामने नगर में आकर रहने का प्रस्ताव रखा, किंतु उन्होंने मना कर दिया। तब राजा ने स्वयं उनकी कुटिया में जाकर यह बात पूछने का निर्णय किया। हालांकि वह समझ नहीं पा रहे थे कि यह बात कैसे पूछें। काफी देर असमंजस में रहने के बाद उन्होंने पूछा कि आपको किसी चीज का अभाव तो नहीं ?
पंडित जी हंसकर बोले कि यह तो मेरी पत्नी ही जानें। तब राजा ने वही बात उनकी पत्नी से पूछी।
वह बोलीं, "राजन ! मेरी कुटिया में कोई अभाव नहीं। मेरे पहनने का वस्त्र अभी इतना नहीं फटा कि उपयोग में न आ सके। जल का मटका अभी तनिक भी फूटा नहीं है और फिर मेरे हाथ में जब तक चूड़ियां हैं, मुझे क्या अभाव। अभाव में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है।"
उस देवी की बातें सुनकर राजा उनके समक्ष श्रद्धा से झुक गए व चुपचाप लौट आए।