Edited By Prachi Sharma,Updated: 28 Jan, 2026 01:58 PM

Sant Tukaram Story : संत तुकाराम का एक शिष्य उनके पास आया। यह बड़ा क्रोधी था और लोगों को अक्सर भला-बुरा कहता रहता था।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Sant Tukaram Story : संत तुकाराम का एक शिष्य उनके पास आया। यह बड़ा क्रोधी था और लोगों को अक्सर भला-बुरा कहता रहता था।
शिष्य ने सवाल किया, "गुरु जी, आपका व्यवहार इतना मधुर कैसे है ? आप कैसे अपने क्रोध पर काबू पा लेते हैं ? आप अपने इस अच्छे व्यवहार का राज़ मुझे भी बताएं।"
गुरु जी बोले, "मेरे रहस्य का तो मुझे नहीं पता लेकिन तुम्हारा एक राज मैं जानता हूं।" शिष्य ने आश्चर्य से पूछा, "कौन-सा राज गुरुजी ?"
गुरुजी ने कहा, “म अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो।" संत तुकाराम की वाणी में दुख साफ झलक रहा था। शिष्य को गुरु की वाणी सत्य लगी। उसने संत तुकाराम से आशीर्वाद लिया और दुखी मन से वहां से चला गया।
इस दिन के बाद उसका क्रोधी स्वभाव बिल्कुल बदल गया। वह अब हर किसी से प्यार से बात करता, क्रोध तो अब उसे आता ही नहीं। इतना ही नहीं, वह उन लोगों के पास जाकर क्षमा भी मांगने लगा, जिनके साथ उसने दुर्व्यवहार किया था। देखते-देखते एक हफ्ता बीत गया। शिष्य को लगा कि अब किसी भी क्षण उसकी मृत्यु हो सकती है तो चलो आखिरी बार गुरु जी का आशीर्वाद ले आएं।
यही सोचकर वह फिर से संत तुकाराम के पास पहुंचा और बोला- गुरु जी अंतिम बार मुझे आशीर्वाद दे दीजिए।
गुरु जी बोले, "मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है पुत्र। अच्छा, ये बताओ कि पिछले 7 दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले की तरह ही लोगों पर गुस्सा हुए, उन्हें अपशब्द कहे ?"
शिष्य ने उत्तर दिया, "बिलकुल नहीं। मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे, मैं इन्हें बेकार की बातों में कैसे गंवा सकता था ?
संत बोले, ‘‘स यही तो मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है। मैं जानता हूं कि मैं कभी भी मर सकता हूं, इसलिए मैं हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता हूं और यही मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है। शिष्य समझ गया कि संत तुकाराम ने उसे जीवन का यह पाठ पढ़ाने के लिए ही मृत्यु का भय दिखाया था।