Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Jan, 2026 02:42 PM

एक दिन गांव में एक वृद्ध पुरुष की मृत्यु हो गई। उसका पुत्र चाहता था कि उसके पिता की आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिल जाए। इस उद्देश्य के साथ वह युवक भगवान बुद्ध के पास गया और अपनी चिंता जाहिर की।
Mahatma Buddha Story : एक दिन गांव में एक वृद्ध पुरुष की मृत्यु हो गई। उसका पुत्र चाहता था कि उसके पिता की आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिल जाए। इस उद्देश्य के साथ वह युवक भगवान बुद्ध के पास गया और अपनी चिंता जाहिर की। उसने महात्मा बुद्ध से कहा, “कृप्या कोई ऐसा उपाय बताएं ताकि मेरे पिता की आत्मा को स्वर्ग में स्थान प्राप्त हो जाए।”
बुद्ध ने उसे कहा, “ऐसा करो, तुम दो मिट्टी के घड़े ले आना, एक में पत्थर भरकर और दूसरे में घी। उन दोनों घड़ों को नदी के बीच ले जाकर फोड़ देना, उसके बाद जो परिणाम आए, मुझे आकर बताना।”
युवक ने वही किया जो महात्मा बुद्ध ने उसे कहा था। वह नदी में उन दो घड़ों को लेकर गया जिनमें पत्थर और घी था। जब उसने पत्थरों वाले घड़े को फोड़ा तो सभी पत्थर पानी में डूब गए। वहीं जब उसने घी वाला घड़ा तोड़ा तो वह भी फूट गया और नदी का बहाव घी को अपने साथ बहाकर ले गया।

अगले दिन वह व्यक्ति दोबारा भगवान बुद्ध के पास गया और उन्हें सारी घटना का ब्यौरा दिया। बुद्ध ने उसे कहा, “ क्या कोई कर्मकांड ऐसा कर सकता है, जिससे कि पत्थर पानी में तैरने लगे या घी सतह पर ही रुक जाए?”
युवक ने जवाब दिया, ‘यह तो संभव नहीं है, पत्थर तो डूबेंगे ही और घी भी बहते पानी के साथ बह जाएगा।”
इस पर महात्मा बुद्ध ने जवाब दिया, “तुम्हारे पिता की आत्मा के साथ भी ऐसा ही है। आपके कर्म ही आपकी आत्मा को स्वर्ग या नर्क में स्थान दिलवाते हैं, अगर उन्होंने अच्छे कर्म किए हैं तो उनकी आत्मा स्वर्ग की ओर प्रस्थान करेगी अन्यथा नर्क की ओर, किसी कर्मकांड से उनके कर्म बदले नहीं जा सकते।”

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