Edited By Niyati Bhandari,Updated: 04 Feb, 2026 12:03 PM

Shani Dev Murti Niyam: हिंदू धर्म में घर के पूजा स्थान पर गणेश, शिव, विष्णु, लक्ष्मी, दुर्गा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें स्थापित की जाती हैं। लेकिन नवग्रहों में प्रमुख माने जाने वाले शनिदेव की मूर्ति या फोटो बहुत कम ही किसी घर के...
Shani Dev Murti Niyam: हिंदू धर्म में घर के पूजा स्थान पर गणेश, शिव, विष्णु, लक्ष्मी, दुर्गा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें स्थापित की जाती हैं। लेकिन नवग्रहों में प्रमुख माने जाने वाले शनिदेव की मूर्ति या फोटो बहुत कम ही किसी घर के मंदिर में देखने को मिलती है। जबकि शनिवार के दिन शनि मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मंदिरों में पूजे जाने वाले शनिदेव को घर में स्थापित क्यों नहीं किया जाता? इसके पीछे पौराणिक कथाएं, ज्योतिषीय मान्यताएं और शास्त्रीय नियम बताए जाते हैं।
Story of shani dev पौराणिक कथा: शनिदेव को मिला श्राप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे और वे सदैव उनकी भक्ति में लीन रहते थे। एक बार उनकी पत्नी उनके पास आईं, लेकिन ध्यान और भक्ति में मग्न शनिदेव ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। इससे आहत होकर शनिदेव की पत्नी ने क्रोध में उन्हें श्राप दे दिया कि जो भी व्यक्ति शनिदेव की सीधी दृष्टि में आएगा, उसे जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
मान्यता है कि इसी श्राप के कारण शनिदेव की दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली और कठोर माना गया। यही वजह है कि घर में उनकी मूर्ति या तस्वीर स्थापित करने से परहेज किया जाता है, ताकि उनकी सीधी दृष्टि गृहस्थ जीवन पर न पड़े।

ज्योतिषीय मान्यताएं: आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव की आशंका
ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, घर के पूजा स्थान में शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर रखना अशुभ माना जाता है।
ऐसा विश्वास है कि इससे:
आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
धन हानि और कर्ज की स्थिति बन सकती है।
परिवार में कलह और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
घर में लक्ष्मी का वास स्थिर नहीं रहता।
इसी कारण लोग शनिदेव को घर में विराजमान करने के बजाय मंदिरों में उनकी पूजा करना अधिक शुभ मानते हैं।

Why is Lord Shani worshipped only in temples मंदिर में ही क्यों होती है शनिदेव की पूजा?
मान्यता है कि शनिदेव की ऊर्जा अत्यंत तीक्ष्ण और कठोर होती है। उनका स्वरूप दंड देने वाले न्यायाधीश का है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। घर का वातावरण इस तीव्र ऊर्जा को संतुलित नहीं कर पाता, इसलिए शनि देव के दर्शन और पूजन के लिए मंदिर को ही उपयुक्त स्थान माना गया है।
शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर:
सरसों का तेल चढ़ाना, शनि चालीसा का पाठ, काले तिल, उड़द, लोहे और वस्त्र का दान एवं जरूरतमंदों की सहायता को विशेष फलदायी माना जाता है।
घर में शनि यंत्र रखने की अनुमति
हालांकि कुछ लोग घर में शनि यंत्र रखते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से स्थापित शनि यंत्र साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव को कम करता है लेकिन शनि यंत्र को घर में रखने से पहले किसी योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से प्राण-प्रतिष्ठा कराना अनिवार्य माना गया है।
शनिवार का दिन
उत्तर या पश्चिम दिशा
विधिपूर्वक स्थापना
इन नियमों का पालन करने पर ही शनि यंत्र शुभ फल देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में वही मूर्तियां और तस्वीरें स्थापित करनी चाहिए जो शांति, सौम्यता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हों। चूंकि शनिदेव को कठोर न्याय और कर्मफल देने वाला देवता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा मंदिरों में ही करना श्रेष्ठ और सुरक्षित माना गया है।
