Religious Katha : कामदेव की राख से जन्मा महा-संकल्प, जानें माता पार्वती की वह तपस्या जिसने महादेव के वैराग्य को प्रेम में बदल दिया

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 04:17 PM

religious katha

हिंदू पुराणों में भगवान शिव और माता पार्वती की कथा केवल एक विवाह की कहानी नहीं है, बल्कि यह तप, धैर्य और संकल्प की पराकाष्ठा है। जब सौंदर्य और बाहरी आकर्षण महादेव को समाधि से जगाने में विफल रहे, तब जन्म हुआ माता पार्वती के उस हठ का, जिसने देवताओं को...

Religious Katha : हिंदू पुराणों में भगवान शिव और माता पार्वती की कथा केवल एक विवाह की कहानी नहीं है, बल्कि यह तप, धैर्य और संकल्प की पराकाष्ठा है। जब सौंदर्य और बाहरी आकर्षण महादेव को समाधि से जगाने में विफल रहे, तब जन्म हुआ माता पार्वती के उस हठ का, जिसने देवताओं को भी अचंभित कर दिया। अक्सर हम प्रेम को केवल एक भावना मानते हैं, लेकिन माता पार्वती ने सिद्ध किया कि सच्चा प्रेम एक अखंड साधना है। यह कथा शुरू होती है कामदेव के भस्म होने की उस राख से, जहां संसार को लगा कि प्रेम का अंत हो गया, परंतु माता पार्वती के लिए वही क्षण उनके महा-तप का आरंभ था। उन्होंने राजसी वस्त्रों को त्याग कर वल्कल धारण किए और हिमालय की कंदराओं में वह तपस्या शुरू की, जिसने युगों-युगों से वैराग्य में लीन महादेव के हृदय के द्वार खोल दिए। तो आइए जानते हैं शिव-शक्ति के इस पावन मिलन के पीछे छिपी उस घोर तपस्या के रहस्य को के बारे में-

Religious Katha

जब कामदेव हुए भस्म: वासना का अंत
कथा तब शुरू होती है जब तारकासुर के आतंक से मुक्ति के लिए महादेव का पुत्र होना अनिवार्य था। परंतु शिव, सती के वियोग में गहरी समाधि में लीन थे। देवताओं के आग्रह पर कामदेव ने महादेव की समाधि भंग करने के लिए पुष्प बाण चलाया। क्रोधित महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोला और कामदेव को भस्म कर दिया। यह इस बात का प्रतीक था कि शिव को वासना या बाहरी आकर्षण से नहीं जीता जा सकता।

Religious Katha

पार्वती का महा-संकल्प: सौंदर्य नहीं, साधना का मार्ग
जब कामदेव भस्म हो गए, तो माता पार्वती ने समझ लिया कि महादेव को पाने के लिए रूप और सौंदर्य पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग किया और घोर तपस्या का मार्ग चुना। उन्होंने वर्षों तक केवल फल और पत्तों का सेवन किया।एक समय ऐसा आया जब उन्होंने सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उनका नाम अपर्णा पड़ा। भीषण गर्मी में चारों ओर अग्नि जलाकर तप करना और कड़ाके की ठंड में बर्फीले जल में खड़े रहकर मंत्र जप करना उनकी दिनचर्या बन गई।

पार्वती के संकल्प को परखने के लिए स्वयं शिव ने एक युवा ब्राह्मण का रूप धरा। उन्होंने पार्वती के सामने शिव की बुराई की "वह श्मशान में रहते हैं, भस्म लगाते हैं, उनका कोई कुल नहीं है। तुम उनसे विवाह क्यों करना चाहती हो ?"

पार्वती ने अत्यंत विनम्रता पर दृढ़ता के साथ उत्तर दिया "मेरा मन महादेव के चरणों में अर्पित हो चुका है, अब चाहे वह जो भी हों, मेरे वही हैं।"

पार्वती की निष्काम भक्ति देखकर महादेव का वैराग्य पिघल गया। उन्होंने अपने वास्तविक स्वरूप में दर्शन दिए और कहा— "आज से मैं तुम्हारे तप के कारण तुम्हारा ऋणी हूं।" कामदेव की राख से जिस संकल्प का जन्म हुआ था, उसने सिद्ध कर दिया कि प्रेम जब साधना बन जाता है, तो वह ईश्वर को भी झुकने पर विवश कर देता है।

Religious Katha

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ


 

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!