Israel-Iran War 2026: वास्तु के अनुसार क्यों होते हैं देशों के बीच युद्ध? जानें अमेरिका, इजराइल और ईरान की भौगोलिक स्थिति का रहस्य

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 01:33 PM

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Israel-Iran War 2026: 28 फरवरी 2026 को इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के विभिन्न शहरों पर एक संयुक्त हमला किया। शुरुआती हमलों में खास अधिकारियों, मिलिट्री कमांडरों और जगहों को निशाना बनाया गया, इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई...

Israel-Iran War 2026: 28 फरवरी 2026 को इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के विभिन्न शहरों पर एक संयुक्त हमला किया। शुरुआती हमलों में खास अधिकारियों, मिलिट्री कमांडरों और जगहों को निशाना बनाया गया, इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के साथ उनके खास अधिकारी और मिलिट्री कमांडर भी मारे गये। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने मिडिल ईस्ट में दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनका निशाना इज़राइल, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर और यूनाइटेड अरब अमीरात थे।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इजरायल के साथ ईरान पर जो हमले शुरू किए इसका उद्देश्य ईरान की मिसाइल और सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना, उसे परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना और अंततः शासन को गिराना था। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आई. आर. जी. सी.) के सदस्यों से प्रतिरक्षा के बदले में अपने हथियार डालने का आह्वान किया, चेतावनी दी कि इनकार का मतलब “निश्चित मृत्यु“ होगी। इस पर भी ईरान से सीजफायर करने से मना कर दिया और लगातार युद्ध करने की राह चुनी।

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आइये वास्तु की दृष्टि जानते हैं कि देशों के मध्य युद्ध की स्थिति क्यों बनती है-
विश्व के सभी देश अपनी-अपनी भौगोलिक स्थितियों के अनुसार विकसित-अविकसित है। कई देश तरक्की कर रहे है तो कई बर्बाद हो रहे हैं। कहीं शांति होती है तो कहीं हमेशा युद्ध चलते रहते हैं। कई देशों में खूब खाने को है तो कहीं भुखमरी की हालत है। जब हम वास्तु की दृष्टि से किसी भी देश की भौगोलिक स्थिति का एक इकाई के रूप में अध्ययन करते हैं तो उससे एकदम स्पष्ट हो जाता है कि, क्यों कोई राष्ट्र सम्पन्न या विपन्न है, शक्तिशाली या शक्तिविहीन है।

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वास्तुशास्त्र के अनुसार किसी भी देश की भूमि की ऊंचाई, निचाई और दिशाओं का घटना-बढ़ना अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है।

जब हम पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति का वास्तु सिद्धान्तों के अनुसार अध्ययन करते हैं तो हम पाते हैं कि जो राष्ट्र प्रभुता सम्पन्न है, शक्तिशाली एवं समृद्ध है, जिनकी ताकत का लोहा विश्व के अन्य देश मानते हैं उन देशों के दक्षिण-पश्चिम दिशा में ऊंचाई है और उत्तर-पूर्व दिशा में निचाई है। इसके विपरीत जिन देशों में उत्तर-पूर्व दिशा में ऊंचाई और दक्षिण-पश्चिम दिशा में निचाई है वह देश कमजोर है और कम विकसित होने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की समस्याओं से सदियों से जूझ रहे हैं।

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अब यहां हम यू.एस.ए., इजराइल और ईरान की भौगोलिक स्थिति का वास्तु विश्लेषण करते हैं-
अमेरिका की भौगोलिक स्थिति- अमेरिका की उत्तर दिशा में कनाडा और दक्षिण एवं नैऋत्य कोण में मैक्सिको है। इसकी पूर्व एवं पश्चिम दिशा पानी से घिरी है। एक ओर जहां उत्तर ईशान कटा हुआ है वहीं दूसरी ओर पूर्व ईशान बढ़ा हुआ है, किन्तु कटे हुए उत्तर ईशान में झील के रूप में पानी का बड़ा जमाव है। जहां पर विश्व प्रसिद्ध न्याग्रा फाल है। यहां भूमि की ढलान भी उत्तर, पूर्व दिशा तथा ईशान कोण की तरफ ही है।

उत्तर, पूर्व दिशा एवं ईशान कोण की इन्हीं वास्तुनुकूलताओं के कारण अमेरिका को यश और समृद्धि मिली है। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के कारण देश पूर्णतः विकसित है।

अमेरिका का पूर्व आग्नेय कोण बढ़ा हुआ है जहां फ्लोरिडा है। बढ़ाव के कारण इसे दूसरे देशों से युद्ध करने पड़े, आज भी कई देशों से युद्ध चल रहे है और आगे भी यही स्थिति बनती रहेगी।

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अमेरिका की पश्चिम दिशा में रॉकी माऊंटेन, कोलोराडो प्लेटियो है। पश्चिम दिशा की इस ऊंचाई वाली भौगोलिक स्थिति के कारण ही अमेरिका को हमेशा युद्ध में सफलता और यश मिलता है। इस सिद्धान्त का वर्णन रामायण में भी मिलता है जो इस प्रकार है -

वाल्मीकि रामायण के किष्किन्धा काण्ड में बाली वध के उपरान्त जब श्रीराम व लक्ष्मण प्रस्रवण पर्वत पर निवास के लिए अनुकूल स्थान की तलाश कर रहे थे, तब पर्वत की सुन्दरता का वर्णन करते हुए एक स्थान पर रुककर राम अनुज लक्ष्मण से कहते हैं-‘‘लक्ष्मण, यह स्थान देखो इस स्थान का ईशान कोण नीचा व पश्चिम ऊंचा है। यहां पर पर्णकुटी बनाना श्रेष्ठ रहेगा। यह स्थान सिद्धिदायक एवं विजय दिलाने वाला है।’’

इजराइल की भौगोलिक स्थिति - इजराइल के दक्षिण में रेगिस्तान है, उत्तर में नीचा है जहां जल के स्रोत है। पूर्व में अत्यन्त गहरा मृत सागर Dead sea है फिर क्या कहना? इसी भौगोलिक स्थिति से इस को विश्वभर में प्रचण्ड एवं ताकतवर देश के रूप में यश मिल रहा है। दूसरी ओर उत्तर दिशा में माऊंट मेरोन है। इस कारण उत्तर दिशा ऊंची है। जिससे अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी में अपयश का सामना करना पड़ता है।

इसका ईशान कोण बढ़ा हुआ है जो कि, वास्तु दृष्टि से शुभ होकर समृद्धि दिलाने में सहायक हो रहा है।

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दक्षिण दिशा में Negev desert है। गाजा पट्टी के बाद दक्षिण दिशा में त्रिकोण का आकार है। वास्तु सिद्धान्त के अनुसार त्रिकोण आकार के प्लॉट पर बने मकान में रहने वालों को शत्रुओं से कष्ट होता है। व्यवसाय हो तो प्रतिद्वन्द्वी से समस्याएं होती हैं। इसी आकार के कारण इजराइल को भी फिलीस्तीन से समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति - ईरान के मध्य उत्तर में कैस्पियन सागर है। जो कि यश दिलाने में सहायक है।

मध्य पूर्व भाग में निचाई है, जोकि देश की आर्थिक स्थिति को ठीक-ठाक रखने में सहायक है।

दक्षिण दिशा में परशीयन गल्फ है। इसलिए दक्षिण दिशा वाला भाग नीचा है। दक्षिण दिशा नीची होने पर सम्पदा नष्ट होती है, युद्ध के लिए धमकाया जाता है, स्त्रियों को उचित सम्मान नहीं मिलता है।

ईरान का पूर्व आग्नेय वाला भाग बढ़ा हुआ है। इस कारण देश में विवादों के कारण अराजकता रहती है।

दूसरी ओर उत्तर वायव्य कोण बढ़ा हुआ है। जिससे विवाद के कारण जनहानि होती है और वहां के निवासियों को मानसिक चिंता रहती है।

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सभी देशों की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करने से पता चलता है कि यू.एस.ए. और इजराइल की भौगोलिक स्थिति ईरान की भौगोलिक स्थिति से ज्यादा वास्तुअनुकूल है। इसी कारण यू.एस.ए. और इजराइल, ईरान से ज्यादा ताकतवर हैं। लेकिन ईरान के मध्य उत्तर में कैस्पियन सागर के कारण ईरान की प्रतिष्ठा बनी रहेगी। जब भी यह युद्ध समाप्त होगा तो ईरान अपनी शर्तों के साथ इस युद्ध को समाप्त करेगा। समझौते में ईरान की प्रतिष्ठा को हानि नहीं पहुंचेगी। ईरान निश्चित ही छोटा देश है वहां जन और धन हानि अधिक होगी, लेकिन वह युद्ध में इस तरह से जवाबी कार्यवाही करेगा कि यू.एस.ए. और इजराइल को भी काफी हानि होगी और निश्चित ही दुनिया में ईरान के बारे में यही कहा जायेगा कि यह अपनी पूरी ताकत से लड़ा और गजब लड़ा।

वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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