Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Nov, 2026 04:48 PM

दीपावली से पहले आने वाला काली चौदस का पर्व शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां काली की पूजा करके भय, नकारात्मकता और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
Kali Chaudas 2026 Worship : दीपावली से पहले आने वाला काली चौदस का पर्व शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां काली की पूजा करके भय, नकारात्मकता और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां काली की आरधना करने से आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। काली चौद को नरक चतुर्दशी से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्यचारी नरकासुर का वध करके हजारों बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। तो आइए जानते हैं काली चौदस की नरकासुर वध की कथा और इस रात मां काली की पूजा का विशेष महत्व।
क्या है नरकासुर वध की पौराणिक कथा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर प्राग्ज्योतिषपुर का शक्तिशाली असुर राजा था। अपनी शक्ति के अहंकार में उसने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उसने देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए और हजारों स्त्रियों को बंदी बना लिया। नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। इसके बाद श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ असुर के विरुद्ध युद्ध करने पहुंचे। भीषण युद्ध के दौरान नरकासुर का अंत हुआ और बंदी बनाई गई स्त्रियों को आजादी मिली। इस विजय को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में याद किया जाता है। मान्यता है कि नरकासुर ने मृत्यु से पहले इच्छा जताई थी कि उसकी मृत्यु के दिन को शोक के बजाय उत्सव के रूप में मनाया जाए। इसी कारण नरक चतुर्दशी पर दीप जलाने और खुशियां मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।

काली चौदस की रात मां काली की पूजा क्यों होती है?
मां काली को आदिशक्ति का उग्र और शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। वे अधर्म, अहंकार और बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी हैं। काली चौदस की रात उनकी पूजा करने के पीछे मान्यता है कि देवी भक्तों को भय और नकारात्मक प्रभावों से बचाती हैं। गुजरात और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में काली चौदस का विशेष महत्व है। इस रात मां काली और हनुमान जी की पूजा की जाती है। भक्त दीप जलाकर, मंत्र-जाप करके और देवी की स्तुति करके सुख-शांति तथा सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।

काली चौदस का धार्मिक महत्व
मां काली की आराधना को साहस और आत्मबल बढ़ाने वाला माना जाता है। नरकासुर वध की कथा बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है। दीपदान अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। यह पर्व व्यक्ति को अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करने की प्रेरणा देता है।

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