Shukra Pradosh Vrat Katha : क्यों जरूरी है प्रदोष व्रत की कथा का पाठ? जानें धनिक पुत्र की रोचक कहानी

Edited By Updated: 23 Oct, 2026 12:22 PM

shukra pradosh vrat katha

सनतान धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से देवों के देव महादेव की खास कृपा प्राप्त होती है और मन की हर...

Shukra Pradosh Vrat Katha : सनतान धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत खास महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि प्रदोष काल में महादेव की पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से देवों के देव महादेव की खास कृपा प्राप्त होती है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सुख-शांति, पारिवारिक खुशहाली और  वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने के लिए शुभ माना जाता है। शुक्र प्रदोष के दिन भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करने के साथ व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। तो आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की पावन कथा के बारे में-

Shukra Pradosh Vrat Katha

शुक्र प्रदोष व्रत की पावन कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे, जिनमें एक राजकुमार, दूसरा ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र था। तीनों विवाहित थे, लेकिन धनिक पुत्र की पत्नी का गौना अभी नहीं हुआ था। एक दिन स्त्रियों की चर्चा के दौरान ब्राह्मण कुमार ने कहा कि जिस घर में नारी नहीं होती, वह घर सूना लगता है। यह सुनकर धनिक पुत्र अपनी पत्नी को लाने के लिए ससुराल जाने को तैयार हो गया। उसके माता-पिता ने समझाया कि शुक्र अस्त होने के कारण इस समय पत्नी की विदाई कराना शुभ नहीं है, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। ससुराल पहुंचने पर भी सास-ससुर ने उसे रोकने की कोशिश की, मगर वह पत्नी को लेकर घर लौटने लगा।

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रास्ते में उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोटें भी आईं। आगे चलकर डाकुओं ने उनका सारा धन लूट लिया। किसी तरह घर पहुंचने के बाद धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। वैद्य ने उसकी हालत देखकर कहा कि वह तीन दिन से अधिक जीवित नहीं रहेगा। यह खबर सुनकर ब्राह्मण कुमार उसके घर पहुंचा और माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। उसने धनिक पुत्र को पत्नी सहित वापस ससुराल भेजने के लिए भी कहा। माता-पिता ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और बेटे को ससुराल भेज दिया। कथा के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद उसकी तबीयत सुधरने लगी और सभी कष्ट दूर हो गए।

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