Kanyakumari Shakti Peeth: त्रिवेणी संगम में छिपा है शक्ति का अद्भुत केंद्र, आज भी मां भद्रकाली करती हैं जीवंत चमत्कार

Edited By Updated: 23 Jul, 2025 08:28 AM

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हिंदू धर्म में शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। देवी भागवत पुराण में जहां 108 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है, वहीं तंत्र चूड़ामणि ग्रंथ में इनकी संख्या 52 बताई गई है। हालांकि, आमतौर पर 51 शक्तिपीठों को ही मुख्य रूप से माना जाता है। ये वे स्थान हैं जहां...

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Kanyakumari Shakti Peeth:  हिंदू धर्म में शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। देवी भागवत पुराण में जहां 108 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है, वहीं तंत्र चूड़ामणि ग्रंथ में इनकी संख्या 52 बताई गई है। हालांकि, आमतौर पर 51 शक्तिपीठों को ही मुख्य रूप से माना जाता है। ये वे स्थान हैं जहां देवी सती के अंग पृथ्वी पर गिरे थे और हर स्थान देवी की शक्ति से जुड़ा हुआ है। इन्हीं शक्तिपीठों में एक प्रमुख स्थान है कन्याकुमारी शक्तिपीठ, जो भारत के तमिलनाडु राज्य में समुद्र के किनारे स्थित है। यह स्थान केप कन्याकुमारी के नाम से भी जाना जाता है। यहां देवी को कुमारी अम्मन के नाम से पूजा जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर देवी सती की रीढ़ की हड्डी गिरी थी, जिससे यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया। यहां की देवी को कई नामों से जाना जाता है- कन्या देवी, कन्याकुमारी, और भद्रकाली। यह मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि आत्मिक शांति और शक्ति की अनुभूति के लिए भी प्रसिद्ध है। देश-विदेश से भक्त यहां देवी के दर्शन के लिए आते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं।

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3000 साल पुराना है ये मंदिर
कन्याकुमारी में स्थित शक्तिपीठ का मंदिर प्राचीनता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 3,000 वर्ष पुराना है और इसकी परंपरा आज भी जीवित है। यह पवित्र स्थान मजबूत पत्थरों से बनी दीवारों से घिरा हुआ है, जो इसकी रक्षा के साथ-साथ इसकी भव्यता को भी दर्शाता है। मंदिर परिसर में सिर्फ देवी कुमारी का ही नहीं, बल्कि कई अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं। यहां भगवान सूर्य, भगवान गणेश, भगवान अयप्पा, देवी बाला सुंदरी और देवी विजया सुंदरी की भी आराधना की जाती है। ये सभी छोटे मंदिर इस परिसर की आध्यात्मिक विविधता को दर्शाते हैं। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में स्थित है, जिससे अधिकांश श्रद्धालु प्रवेश करते हैं। वहीं पूर्वी द्वार को विशेष महत्व प्राप्त है, यह द्वार सामान्य दिनों में बंद रहता है और केवल खास त्योहारों या अवसरों पर ही खोला जाता है। यह मंदिर न केवल एक शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता भी लोगों को आकर्षित करती है।

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यहां की सुंदरता मोह लेती है मन 
कन्याकुमारी शक्तिपीठ न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि इसका प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण भी इसे खास बनाता है। इस मंदिर की वास्तुकला इतनी भव्य और आकर्षक है कि हर श्रद्धालु और पर्यटक इसे देखकर आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता। इस स्थान की सबसे खास बात है – तीन समुद्रों का संगम। मंदिर के पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर, और पश्चिम में अरब सागर आकर एक-दूसरे से मिलते हैं। यह दृश्य न सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि इसे देखकर आत्मा को शांति का अनुभव होता है। यहां से समुद्र में उगता और डूबता सूरज देखना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यह संगम स्थल, आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है, जिससे यह स्थान एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। मंदिर परिसर के पास ही विवेकानंद स्मारक स्थित है, जो महान संत स्वामी विवेकानंद की स्मृति में बनाया गया है। यहीं पर हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 45 घंटे की साधना कर इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता को और भी अधिक गहरा कर दिया।

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