Kashi Vishwanath Ganga Aarti : वाराणसी में गंगा आरती का नया सिस्टम लागू ! समय, रास्ते और लोकेशन में बड़ा बदलाव

Edited By Updated: 21 Mar, 2026 09:28 AM

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Shri Kashi Vishwanath Temple की ओर से अब ललिता घाट और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती के समय और व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार, आरती प्रतिदिन शाम 6:30 बजे शुरू होकर करीब 7:15 बजे तक चलेगी। इसमें सात अर्चक और शिवभक्त...

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Shri Kashi Vishwanath Temple की ओर से अब ललिता घाट और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती के समय और व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार, आरती प्रतिदिन शाम 6:30 बजे शुरू होकर करीब 7:15 बजे तक चलेगी। इसमें सात अर्चक और शिवभक्त निर्धारित समय पर घाट की सीढ़ियों पर पहुंचकर विधिवत आरती करेंगे।

नमो घाट पर आरती के स्थान को भी बदला गया है। अब यह आयोजन फेज-2 क्षेत्र में किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि पहले फेज-1 में भीड़ ज्यादा हो रही थी, जबकि फेज-2 अपेक्षाकृत खाली रहता था। नए बदलाव से भीड़ का संतुलन बेहतर होगा और श्रद्धालुओं को खुला स्थान व बैठने की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

गंगा आरती में शामिल होने के लिए आने-जाने के रास्तों को भी स्पष्ट किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति न रहे। अब भक्त चार प्रमुख मार्गों से आरती स्थल तक पहुंच सकेंगे और वापस लौट सकेंगे। हालांकि, निर्माण कार्य के कारण Manikarnika Ghat से ललिता घाट तक सीधा मार्ग फिलहाल बंद कर दिया गया है, जिससे उस रास्ते से आवागमन संभव नहीं होगा।

प्रवेश और वापसी के प्रमुख रास्ते इस प्रकार हैं:

गेट नंबर 4 से प्रवेश कर शंकराचार्य चौक होते हुए गंगा द्वार से आरती स्थल तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन इस मार्ग पर मोबाइल बाहर जमा करना अनिवार्य रहेगा।
Dashashwamedh Ghat से लगभग 500 मीटर पैदल चलकर ललिता घाट पहुंचा जा सकता है और वापसी भी इसी रास्ते से होगी।
Vishalakshi Temple से मीरघाट के रास्ते सीधे ललिता घाट पहुंचा जा सकता है, और यही मार्ग वापसी के लिए भी खुला रहेगा।
Neelkanth Dwar से भी श्रद्धालु आरती स्थल तक आ-जा सकते हैं।

मंदिर प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रद्धालु मंदिर के भीतर से आरती के लिए जाएंगे, वे वापसी में गंगा द्वार के अंदर तक ही आ पाएंगे। इसके बाद उन्हें सतुआ बाबा आश्रम के पास बने छोटे द्वार से बाहर निकलकर मणिकर्णिका गली के रास्ते बाहर जाना होगा। इन नई व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाना, भीड़ को नियंत्रित करना और गंगा आरती के अनुभव को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है।

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