Kathmandu: काठमांडू, जहां हर गली में बसी है परम्परा और हर दिल में जागता है अध्यात्म

Edited By Updated: 03 Aug, 2025 01:49 PM

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Kathmandu: नेपाल की राजधानी काठमांडू केवल हिमालय की छांव में बसा एक नगर नहीं, यह आस्था, परम्परा और अध्यात्म का जीवंत केंद्र है। यह सिर्फ पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने वाले अपने पवित्र मंदिरों के लिए...

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Kathmandu: नेपाल की राजधानी काठमांडू केवल हिमालय की छांव में बसा एक नगर नहीं, यह आस्था, परम्परा और अध्यात्म का जीवंत केंद्र है। यह सिर्फ पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने वाले अपने पवित्र मंदिरों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है।

पशुपतिनाथ मंदिर
इस आध्यात्मिक भूमि का सबसे प्रमुख रत्न है पशुपतिनाथ मंदिर। यह कोई साधारण शिवालय नहीं, बल्कि हिन्दू आस्था का धड़कता दिल है, एक ऐसा स्थल जहां जीवन, मृत्यु, मोक्ष और ईश्वर की अनुभूति साथ-साथ चलती है। बागमती नदी के किनारे बसा यह मंदिर, मानो हिमालय की गोद में छिपा एक सजीव शिवलोक है। यह एक ऐसी भूमि है जहां हर मोड़ पर आस्था की कोई न कोई गूंज सुनाई देती है। यह काठमांडू का सबसे प्रसिद्ध और पूज्यनीय हिन्दू मंदिर है, जोकि 1979 से एक विश्व धरोहर स्थल भी है। इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है, इसका उल्लेख नेपाल महात्म्य और स्कंद पुराण में भी मिलता है। यह मंदिर 5वीं शताब्दी से अस्तित्व में माना जाता है, पर वर्तमान स्वरूप 17वीं शताब्दी में राजा भूपेन्द्र मल्ल द्वारा निर्मित है। मंदिर की मूल संरचना लकड़ी की थी जिसे दीमकों ने खा लिया था, जिसके बाद 15वीं शताब्दी में इसे पत्थर और धातु से बनाया गया था। वर्तमान मंदिर में दो मंजिला सोने की छत वाला शिवालय है और इसके आस-पास 500 से अधिक अन्य मंदिर, तीर्थस्थल और दाह संस्कार स्थल हैं।

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मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पशु योनि से मुक्ति मिलती है। आंतरिक गर्भगृह में प्रवेश केवल हिंदुओं के लिए है लेकिन परिसर का बाकी हिस्सा सभी के लिए खुला है।

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर नेपाली स्थापत्य शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिन्हें पशुपतिनाथ के रूप में पूजा जाता है। ‘पशुपति’ में से पशु का मतलब है ‘जीवन’ और ‘पति’ मतलब स्वामी या मालिक, यानी ‘जीवन का मालिक’ या ‘जीवन का देवता’।

चार चेहरों वाला शिवलिंग
पशुपतिनाथ दरअसल, चार चेहरों वाला शिवलिंग है। पूर्व दिशा वाले मुख को तत्पुरुष और पश्चिम की ओर वाले मुख को संज्योत कहते हैं। उत्तर दिशा की ओर देख रहा मुख वामवेद है, तो दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोरा कहते हैं।

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स्वयंभूनाथ स्तूप
इसके अतिरिक्त काठमांडू में पर स्वयंभूनाथ स्तूप (स्वयंभूनाथ मंदिर) है, जिसे ‘मंकी टैम्पल’ भी कहा जाता है। यह एक प्राचीन बौद्ध स्तूप है जो एक पहाड़ी पर स्थित है और पूरे काठमांडू शहर का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। इसका श्वेत गुंबद, बुद्ध की नजरें और रंग-बिरंगे प्रार्थना झंडे इसकी विशेषता हैं।

बौद्धनाथ स्तूप : बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह एक अत्यंत पवित्र स्थल है। यह एशिया का सबसे बड़ा गोलाकार स्तूप है। यहां हजारों तिब्बती बौद्ध भिक्षु निवास करते हैं। प्रार्थना चक्र घुमाते हुए श्रद्धालु स्तूप की परिक्रमा करते हैं।

गुह्येश्वरी मंदिर : यह मंदिर देवी शक्ति को समर्पित है और पशुपतिनाथ के समीप ही स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। नवरात्रि और दशहरा के समय यहां विशेष आयोजन होते हैं।

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काठमांडू दुबार स्क्वायर (हनुमान ढोका परिसर) : यह यूनैस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसमें काष्ठ मंडप, हनुमान ढोका, और कई मंदिर व महलों का समूह है। यहां का कुमारी घर भी प्रसिद्ध है जहां जीवित देवी (कुमारी) निवास करती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर, नेपाल : यह मंदिर काशी विश्वनाथ के स्वरूप में भगवान शिव को समर्पित है। यह भी दर्शनीय और पवित्र स्थल माना जाता है।

ताल बहाल और अशोक विनायक मंदिर : यह न्यूरी बौद्ध समुदाय के प्रसिद्ध स्थल हैं। अशोक विनायक को काठमांडू के रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।
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