Khatu Shyam Nishan Yatra : खाटू श्याम का निशान आखिर किस आस्था का प्रतीक है ? जानें रहस्य

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 07:29 AM

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Khatu Shyam Nishan Yatra : खाटू श्याम मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। फाल्गुन माह में लगने वाला प्रसिद्ध लक्खी मेला पूरे उत्साह के साथ जारी है और इसी दौरान भव्य निशान यात्रा भी निकाली जा रही है। इस यात्रा का विशेष धार्मिक...

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Khatu Shyam Nishan Yatra : खाटू श्याम मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। फाल्गुन माह में लगने वाला प्रसिद्ध लक्खी मेला पूरे उत्साह के साथ जारी है और इसी दौरान भव्य निशान यात्रा भी निकाली जा रही है। इस यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है क्योंकि इसमें शामिल श्रद्धालु हाथों में पवित्र ध्वज लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचते हैं।

यह पदयात्रा राजस्थान के रींगस कस्बे से शुरू होती है और लगभग 17 से 18 किलोमीटर की दूरी तय कर खाटू धाम तक पहुंचती है। फाल्गुन मास में आयोजित होने वाले लक्खी मेले के दौरान हजारों भक्त इस यात्रा में भाग लेते हैं। वर्ष 2026 में यह मेला 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

निशान का धार्मिक महत्व

खाटू श्याम बाबा को अर्पित किया जाने वाला ‘निशान’ दरअसल एक पवित्र ध्वज होता है। यह ध्वज उस महान त्याग की याद दिलाता है, जो बाबा ने महाभारत युद्ध के समय धर्म की स्थापना के लिए किया था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के आग्रह पर उन्होंने अपना शीश दान कर दिया था। उनके इस अद्वितीय बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में पूजे जाने का आशीर्वाद दिया।

इसी स्मृति में भक्त केसरिया, नारंगी या लाल रंग का ध्वज लेकर पदयात्रा करते हैं। इन ध्वजों पर श्रीकृष्ण और श्याम बाबा के चित्र, पवित्र मंत्र, नारियल और मोरपंख की आकृतियां भी अंकित रहती हैं, जो श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं।

मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ाया जाता है निशान

ऐसी आस्था है कि खाटू श्याम बाबा के दरबार से कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता। यही कारण है कि पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और इच्छा पूर्ण होने पर आभार स्वरूप निशान चढ़ाने आते हैं। कई श्रद्धालु तो विशेष रूप से पैदल यात्रा कर ध्वज अर्पित करते हैं।

निशान चढ़ाने की यह परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। फाल्गुन मास का लक्खी मेला और निशान यात्रा, श्रद्धा, त्याग और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

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