Edited By Prachi Sharma,Updated: 14 Feb, 2026 11:05 AM

Char Dham Yatra 2026 : हर वर्ष आयोजित होने वाली चारधाम यात्रा लाखों श्रद्धालुओं को हिमालय की वादियों तक ले आती है। ऊंचाई, अनिश्चित मौसम और सीमित संसाधनों के कारण यहां व्यवस्थाएं संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने...
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Char Dham Yatra 2026 : हर वर्ष आयोजित होने वाली चारधाम यात्रा लाखों श्रद्धालुओं को हिमालय की वादियों तक ले आती है। ऊंचाई, अनिश्चित मौसम और सीमित संसाधनों के कारण यहां व्यवस्थाएं संभालना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में हेलिपैड सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कुल 2.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
बद्रीनाथ में यूकाडा के अधीन संचालित स्थायी हेलिपैड का विस्तार किया जाएगा। प्लेटफॉर्म को चौड़ा करने के साथ वहां तक पहुंचने वाले मार्ग को भी बेहतर बनाया जाएगा। इस कार्य के लिए 1.74 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं केदारनाथ में जीएमवीएन के पास स्थित हेलिपैड पर सुरक्षा संबंधी सुधार कार्यों हेतु 39.40 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। माना जा रहा है कि इन सुधारों से आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता तेज होगी और विशेष आवागमन भी अधिक सुरक्षित ढंग से हो सकेगा।
इसी क्रम में वर्ष 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। यह उत्तराखंड की आस्था से जुड़ी एक लंबी और ऐतिहासिक यात्रा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु अलग-अलग पड़ावों से गुजरते हैं। भीड़ प्रबंधन और वाहन पार्किंग यहां की सबसे बड़ी जरूरत होती है। सरकार ने विभिन्न विकासखंडों में पार्किंग और विश्राम गृह निर्माण के लिए कुल 4.60 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
थराली, देवाल, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़ समेत कई प्रमुख स्थानों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग विकसित की जाएगी। कुछ जगहों पर स्थायी ढांचा तैयार होगा तो कुछ स्थानों पर अस्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि यात्रा के दौरान जाम जैसी स्थिति से बचा जा सके। चौपड़यों, सरकोट, नौटी, मगोती, कांसुवा और कुलसारी जैसे पड़ावों पर वाहनों की अनुमानित संख्या के अनुरूप पार्किंग की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त कनोल, आला और रामणी गांवों में भी आवश्यक निर्माण को मंजूरी दी गई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इन पहलों को समग्र रूप से देखें तो स्पष्ट है कि सरकार धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है। चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना हो या नंदा राजजात जैसी परंपरागत यात्रा को बेहतर सुविधाएं देना—इन योजनाओं का सीधा लाभ श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों दोनों को मिलेगा। पहाड़ों की कठिन जीवन परिस्थितियों के बीच ऐसे कदम भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।