Kuber Ji Ki Katha : जानें, कैसे एक भटके हुए युवक को उसकी एक छोटी सी कोशिश ने दिला दिया कुबेर का सिंहासन

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 12:43 PM

kuber ji ki katha

हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान कुबेर को धन-धान्य और सुख-समृद्धि का अधिपति माना गया है, जिनकी कृपा मात्र से दरिद्र भी राजा बन सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अरबों के खजाने के मालिक कुबेर देव का पिछला जन्म बहुत ही अंधकारमय था।

Kuber Ji Ki Katha : हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान कुबेर को धन-धान्य और सुख-समृद्धि का अधिपति माना गया है, जिनकी कृपा मात्र से दरिद्र भी राजा बन सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अरबों के खजाने के मालिक कुबेर देव का पिछला जन्म बहुत ही अंधकारमय था। स्कंद पुराण की एक बेहद रोचक और रहस्यमयी कथा के अनुसार, वर्तमान में देवताओं के कोषाध्यक्ष कहलाने वाले कुबेर अपने पिछले जन्म में एक साधारण चोर थे। यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है कि कैसे चोरी करने की एक कोशिश ने उनके जीवन में ऐसा यू-टर्न लिया कि वे महादेव के परम मित्र और संसार के सबसे धनी देव बन गए। तो आइए जानते हैं उस एक रात की कहानी, जिसने एक भटके हुए युवक की पूरी किस्मत बदल कर रख दी।

Kuber Ji Ki Katha

पौराणिक कथा के अनुसार, कुबेर अपने पिछले जन्म में गुणनिधि नाम के एक ब्राह्मण युवक थे। उनके पिता एक प्रकांड विद्वान थे, लेकिन गुणनिधि बुरी संगति में पड़कर जुआ, चोरी और अधर्म के रास्ते पर चल पड़े थे। जब उनके पिता को उनके कुकर्मों का पता चला, तो उन्होंने गुणनिधि को घर से निकाल दिया। दर-दर भटकते हुए गुणनिधि भूख से व्याकुल थे। एक रात वे भोजन की तलाश में एक शिव मंदिर के पास पहुंचे। उस समय मंदिर में शिवरात्रि का जागरण चल रहा था और भक्तजन प्रसाद चढ़ाकर जा चुके थे। जब रात को सन्नाटा छा गया, तो गुणनिधि चोरी की नीयत से मंदिर के गर्भगृह में घुसे। वहां बहुत अंधेरा था और दीपक बुझने की कगार पर था। मंदिर में रखे धन और प्रसाद को साफ-साफ देखने के लिए गुणनिधि ने एक युक्ति निकाली। उन्होंने अपना वस्त्र फाड़ा और उसकी बत्ती बनाकर दीपक में डाल दी। उन्होंने अपने वस्त्र की बत्ती से मंदिर में फिर से रोशनी कर दी ताकि वे चोरी कर सकें। लेकिन महादेव की दृष्टि में, उन्होंने बुझते हुए दीपक को जलाकर मंदिर में पुनः प्रकाश फैलाया था। 

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भले ही गुणनिधि का इरादा चोरी का था, लेकिन अनजाने में उन्होंने भगवान शिव के सामने 'दीपदान' कर दिया था। इसके कुछ समय बाद जब उनकी मृत्यु हुई, तो यमराज के दूत उन्हें लेने आए, लेकिन शिव के गणों ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव उनकी उस छोटी सी कोशिश से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गुणनिधि के पिछले सारे पाप क्षमा कर दिए। अगले जन्म में गुणनिधि कलिंग देश के राजा के रूप में जन्मे और कठिन तपस्या कर महादेव को प्रसन्न किया। महादेव ने उन्हें अपना मित्र बनाया और उन्हें 'कुबेर' नाम देकर देवताओं का धनपाल नियुक्त कर दिया।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
कुबेर देव की यह कहानी हमें सिखाती है कि ईश्वर के दरबार में किया गया छोटा सा शुभ कार्य भी आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। शिव को 'भोलेनाथ' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भक्त के इरादे से ऊपर उठकर उसके द्वारा किए गए सेवा कार्य को स्वीकार कर लेते हैं। कोई भी व्यक्ति बुरा पैदा नहीं होता; परिस्थितियां उसे भटका सकती हैं, लेकिन सुधरने का मौका सबको मिलता है।

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