Edited By Sarita Thapa,Updated: 29 Oct, 2026 08:24 AM

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि आगमिक मंदिरों में प्रवेश के लिए पूजा का संकल्प लेने या पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने से इंकार करने वाले गैर-हिंदुओं को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चेन्नई (एजैंसी): मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि आगमिक मंदिरों में प्रवेश के लिए पूजा का संकल्प लेने या पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने से इंकार करने वाले गैर-हिंदुओं को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्हें पहले देवता में श्रद्धा का संकल्प लेना होगा। यह फैसला के. थंगम वेंकटेश द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर आया है। न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति पी. मुरुगन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का दायरा केवल ‘आगमिक’ मंदिरों तक ही सीमित है। आगमिक मंदिर वे हिंदू मंदिर हैं जिनका निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा और रख-रखाव प्राचीन आगम शास्त्रों के अनुसार किया जाता है।
अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि ईसाई धर्म को मानने वाले मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अनिवार्य शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद प्रसिद्ध मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। पीठ ने राजनीतिक दिखावे और आस्था के प्रदर्शन के तौर-तरीकों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदू धर्मों को मानने वाले कुछ नेता केवल राजनीतिक लाभ के लिए मंदिरों में जाते हैं और माथे पर धार्मिक चिन्ह लगाकर इसका सार्वजनिक प्रदर्शन करते हैं। मंदिर की परंपराओं को इस तरह की ‘चमचागिरी’ और दिखावे के आगे नहीं झुकना चाहिए।’
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