Edited By Prachi Sharma,Updated: 15 Feb, 2026 02:17 PM

Maha Shivratri Upay 2026 : महाशिवरात्रि की रात को 'सिद्धि की रात्रि' माना जाता है। यदि आपका बिजनेस (Business) ठप पड़ गया है, ग्राहक कम हो गए हैं या मेहनत के बाद भी आमदनी नहीं बढ़ रही है, तो 15 फरवरी 2026 की रात को किए गए ये विशेष ज्योतिषीय उपाय आपके...
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Maha Shivratri Upay 2026 : महाशिवरात्रि की रात को 'सिद्धि की रात्रि' माना जाता है। यदि आपका बिजनेस ठप पड़ गया है, ग्राहक कम हो गए हैं या मेहनत के बाद भी आमदनी नहीं बढ़ रही है, तो 15 फरवरी 2026 की रात को किए गए ये विशेष ज्योतिषीय उपाय आपके व्यापार में नई ऊर्जा भर सकते हैं।

महाशिवरात्रि पर व्यापार वृद्धि का विशेष उपाय
एक कथा के दौरान कथावाचक Pandit Pradeep Mishra ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यापार लगातार घाटे में चल रहा हो और जीवन में आर्थिक परेशानियां बनी हुई हों, तो महाशिवरात्रि की रात एक विशेष उपाय किया जा सकता है। उनके अनुसार महाशिवरात्रि की रात्रि 12 बजे एक धतूरा लेकर उसे हल्दी में अच्छी तरह डुबो दें और फिर श्रद्धा भाव से भगवान शिव को अर्पित करें। लगभग 5 से 10 मिनट बाद उस धतूरे को शिवलिंग के पास से उठा लें। इसके बाद “श्री शिवाय नमस्तुभ्य” मंत्र का उच्चारण करते हुए उस धतूरे को लाल कपड़े में बांध दें। फिर उसे अपने व्यापार स्थल पर किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें या बांध दें। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यापार में धीरे-धीरे प्रगति होने लगती है और रुकावटें दूर होती हैं।

रोग मुक्ति के लिए उपाय
पंडित प्रदीप मिश्रा जी के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमारी से जूझ रहा हो और स्वास्थ्य में सुधार न हो रहा हो, तो शिवरात्रि के दिन एक विशेष विधि अपनाई जा सकती है। इस उपाय में 7 धतूरे लेने होते हैं। इनमें से एक धतूरे पर मौली बांधकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। बाकी छह धतूरों पर हल्दी लगाएं। फिर अलग-अलग श्रद्धा भाव से उन्हें भगवान शिव परिवार को समर्पित करें- एक गणेश जी के स्थान पर, एक कार्तिकेय जी के स्थान पर, एक अशोक सुंदरी जी के स्थान पर, एक माता पार्वती के स्थान पर और एक उस स्थान पर जहां से अभिषेक का जल नीचे गिरता है। इसके बाद जो धतूरा जलधारा वाले स्थान पर चढ़ाया गया हो, उसे उठाकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए बीमार व्यक्ति को स्पर्श कराएं। फिर उस धतूरे को बेलपत्र के पेड़ के नीचे रख दें। ऐसा करने से रोग से राहत मिलने की शुरुआत होने की मान्यता है। इन उपायों को करते समय श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक भाव बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
