Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Feb, 2026 01:59 PM

Phalguna Amavasya 2026 : हिन्दू धर्म में फाल्गुन मास की अमावस्या का विशेष महत्व है। यह हिंदू कैलेंडर के अंतिम महीने की अमावस्या होती है, इसलिए इसे साल की विदाई और नई शुरुआत के संगम के रूप में देखा जाता है।
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Phalguna Amavasya 2026 : हिन्दू धर्म में फाल्गुन मास की अमावस्या का विशेष महत्व है। यह हिंदू कैलेंडर के अंतिम महीने की अमावस्या होती है, इसलिए इसे साल की विदाई और नई शुरुआत के संगम के रूप में देखा जाता है। साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो पितृ दोष से मुक्ति और सात पीढ़ियों के कल्याण के लिए अत्यंत फलदायी माने जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान-पुण्य और तर्पण से न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि पूर्वजों की सात पीढ़ियों को मोक्ष प्राप्त होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि, महत्व और वे कौन से अचूक उपाय हैं जिनसे आप अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
सात पीढ़ियों के उद्धार के लिए अचूक उपाय
गंगा स्नान और तर्पण
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी में स्नान करना सर्वोत्तम है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों के नाम से जल में काला तिल, अक्षत और कच्चा दूध मिलाकर तर्पण करें। ऐसा करने से पितरों की प्यास बुझती है और वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं।
पीपल के वृक्ष की पूजा
शास्त्रों के अनुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों और पितरों का वास होता है। फाल्गुन अमावस्या पर दोपहर के समय पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और संध्याकाल में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल की सात बार परिक्रमा करते हुए ॐ पितृभ्यः नमः मंत्र का जाप करें। यह उपाय वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करता है।
गजेंद्र मोक्ष और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ
पितरों को नर्क की यातनाओं से मुक्त कराने और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए इस दिन 'गजेंद्र मोक्ष' का पाठ करना रामबाण माना जाता है। यदि समय हो तो गीता के सातवें या ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें और उसका फल अपने पितरों को अर्पित करें।
गौ-ग्रास और पंचबली कर्म
अमावस्या के दिन भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इसके अलावा पंचबली (कुत्ता, गाय, कौआ, चींटी और देव) को भोजन का अंश अवश्य दें। माना जाता है कि इन माध्यमों से पितर अपना भाग ग्रहण करते हैं।
दीप दान
शाम के समय घर के ईशान कोण में और दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। इसके अतिरिक्त किसी मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर दीप दान करने से जीवन से दरिद्रता का नाश होता है और पितरों को प्रकाश प्राप्त होता है।