Makar Sankranti 2021: शास्त्रों से जानें, मकर संक्रांति की Importance

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 14 Jan, 2021 05:52 AM

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जब बारह स्वरूप धारण कर आराध्य देव भगवान सूर्य बारह मासों में बारह राशियों मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन का संक्रमण करते हैं। उनके संक्रमण से ही

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Makar Sankranti Ka Mahatva: जब बारह स्वरूप धारण कर आराध्य देव भगवान सूर्य बारह मासों में बारह राशियों मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन का संक्रमण करते हैं। उनके संक्रमण से ही संक्रांति होती है। संक्रांति को सूर्य की गति का प्रतीक तथा सामर्थ्य माना गया है। सूर्य का सामर्थ्य सात देवी मंदा, मंदाकिनी, ध्वांक्षी, घोरा, मंदोदरी, राक्षसी और मिश्रा के नाम से जानी जाती है। विभिन्न राशियों में सूर्य के प्रवेश को विभिन्न नामों से जाना जाता है।

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Why Makar Sankranti Festival Is Celebrated: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 राशियां होती हैं। धनु, मिथुन, मीन तथा कन्या राशि की संक्रांति ‘षड्शीति’ कही जाती है। जब मेष तथा तुला राशि में सूर्य जाता है तो ‘विषुवत संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है। कर्क संक्रांति को ‘यामायन’ और संक्रांति को मकर संक्रांति कहते हैं जो जनवरी में आती है।

2021 Makar Sankranti: पुराणों के अनुसार षड्शीति (धनु, मिथुन, मीन और कन्या राशि की संक्रांति को षड्शीति कहते हैं) संक्रांति में किए गए पुण्य कर्म का फल छियासी हजार गुना, विष्णुपदी में लाख गुना और उत्तरायण या दक्षिणायन प्रारंभ होने के दिन कोटि-कोटि गुना ज्यादा होता है। समस्त संक्रांतियों में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है क्योंकि तब सूर्य देव उत्तरायण में होते हैं।

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Makar Sankranti katha: शायद उत्तरायण की इस महत्ता के कारण ही महाभारत में कौरव-पांडव युद्ध के दौरान भीष्म पितामह घायल होकर बाणों की शैय्या पर लेटे हुए अपनी मृत्यु का इंतजार कर रहे थे। भीष्म ने मकर संक्रांति अर्थात उत्तरायण की स्थिति आने पर ही माघ शुक्ल अष्टमी को अपने प्राण त्यागे। विद्वानों ने इस काल को शुभ बताते हुए उसे देवदान कहा है। सूर्य के उत्तरायण की महत्ता को छांदोग्योपनिषद में भी कहा गया है।

Makar Sankranti 14th January 2021: जब पौष तथा माघ में सूर्य मकर राशि में आ जाता है तब उस दिन और उस समय को संक्रांति का प्रवेश काल कहा जाता है। यही संक्रांति मकर संक्रांति के नाम से जानी जाती है। अंग्रेजी महीनों में यह प्रतिवर्ष चौदह जनवरी को ही मनाया जाता है।

How is Makara Sankranti calculated: भारतीय ज्योतिष में मकर राशि का प्रतिरूप घड़ियाल को माना जाता है जिसका सिर हिरण जैसा होता है लेकिन पाश्चात्य ज्योर्तिवद मकर राशि का प्रति रूप बकरी को मानते हैं। हिन्दू धर्म में मकर (घड़ियाल) को एक पवित्र जीव माना जाता है।

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