Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Mar, 2026 03:35 PM

Navratri Jau Kaise Boye: नवरात्रि में जौ बोना समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। जानिए वास्तु के अनुसार खेतरी जौ बोने की सही विधि, दिशा और नियम।
Khetri Jau Vastu Tips: नवरात्रि के दौरान खेतरी (जौ बोना) बेहद शुभ और धार्मिक परंपरा मानी जाती है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार जौ बोना समृद्धि, उन्नति और मां दुर्गा की कृपा का प्रतीक होता है। सही विधि और दिशा में बोए गए जौ घर में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

खेतरी (जौं) बोने की सही विधि
सही पात्र (बर्तन) का चयन
वास्तु के अनुसार जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र सबसे शुभ माना जाता है। आप चाहें तो तांबे या पीतल का बर्तन भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन प्लास्टिक का उपयोग न करें।
मिट्टी की तैयारी
पात्र में सबसे पहले साफ और शुद्ध मिट्टी डालें। कोशिश करें कि मिट्टी में कोई कंकड़ या गंदगी न हो। इसके बाद उसमें हल्का जल छिड़ककर उसे नम कर लें।

जौ बोने की प्रक्रिया
मिट्टी की पहली परत बिछाएं।
उस पर जौ के बीज समान रूप से फैलाएं।
फिर हल्की मिट्टी की परत डालें।
अंत में ऊपर से थोड़ा जल छिड़क दें।
इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराया जा सकता है।
सही दिशा का ध्यान रखें
वास्तु के अनुसार खेतरी को पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना सबसे शुभ माना जाता है।
यदि यह संभव न हो तो पूर्व दिशा भी उपयुक्त रहती है।
रोज करें देखभाल
प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा जल अर्पित करें।
ध्यान रखें कि पानी अधिक न हो।
खेतरी को साफ और पवित्र स्थान पर रखें।

खेतरी का महत्व (Vastu Significance)
हरे-भरे और लंबे जौ समृद्धि और उन्नति का संकेत देते हैं।
यदि जौ अच्छे से उगते हैं तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संकेत है।
कमजोर या सूखे जौ ऊर्जा असंतुलन का संकेत माने जाते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
जौ बोते समय मन शांत और श्रद्धा से भरा होना चाहिए।
गंदे हाथ या अपवित्र अवस्था में जौ न बोएं।
जौ को पैर से न छुएं।
नवरात्रि के बाद इन जौ को बहते जल में विसर्जित करें।
नवरात्रि में खेतरी (जौ) बोना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और ऊर्जा संतुलन का उपाय है। यदि इसे वास्तु के अनुसार सही विधि से किया जाए तो यह घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता लाने में मदद करता है।
